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रहस्य रोमांच: इन रेलवे स्टेशनों पर आज भी भटकती हैं रहस्यमयी आत्माएं, ये हैं भारत के भूतिया रेलवे स्टेशन

@शब्द दूत ब्यूरो (18 फरवरी 2024)

भूत और भूतनी के नाम से ही शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती है। और जब आपको पता हो कि जिस जगह आप खड़े हैं वहां भूत और भूतनी मौजूद हैं तो आपकी क्या हालत होगी लेकिन फिर भी आपको वहां खड़ा रहना पड़े ये आपकी मजबूरी है। जी हां,आज हम आपको कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बतानें जा रहे हैं। ये जगह है भारत के रेलवे और मेट्रो स्टेशन जहां भूत और भूतनी की मौजूदगी बताई जाती है। हालांकि हम ये दावा नहीं करते कि वहां वास्तव में ऐसा है या नहीं फिर भी ये स्टेशन भारत के भूतिया स्टेशन के रूप में जाने जाते हैं।

सबसे पहले बात करते हैं नैनी रेलवे स्टेशन की। जो कि इलाहाबाद अब प्रयागराज के नाम से कहलाता है। ये तो आप जानते ही हैं कि नैनी जेल में कई हिन्दुस्तानियों की अंग्रेजों के टॉर्चर से मौत हुई थी। इस जेल से कुछ ही दूरी पर नैनी का रेलवे स्टेशन स्थित है‌। माना जाता है कि इस रेलवे स्टेशन के पास जेल में मारे गए स्वतंत्रता सेनानियों की आत्माएं रहती हैं। यहां कभी कोई अप्रिय घटना तो नहीं घटी, लेकिन लोगों का मानना है कि स्टेशन के पास आत्माएं भटकती रहती हैं और रात के समय यहां रोने-चीखने की आवाजें आती हैं।

दिल्ली के द्वारिका मेट्रो स्टेशन के बारे में भी ऐसा ही कहा जाता है ये दिल्ली के इस मेट्रो स्टेशन के बारे में कहा जाता है कि वहां सफेद कपड़े पहने एक महिला की आत्मा रहती है। जो इलाके से गुजरने वाली कारों के पीछे दौड़ती है। कुछ राहगीरों ने अपने दरवाज़े पर दस्तक सुनने और किसी अज्ञात द्वारा थप्पड़ मारे जाने की भी शिकायत की है। यही नहीं इस कारण से यहां  कई दुर्घटनाएं भी सामने आई हैं।

बेगुनकोडोर, कोलकाता से 161 किमी दूर एक गांव है। यहां के स्टेशन पर रेलवे वर्कर ने किसी को देखा और दूसरे दिन उसकी मौत हो गई। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि सफेद साड़ी पहनी एक महिला कभी पटरियों पर, तो कभी प्लेटफॉर्म पर दौड़ती है। कई बार उसके पास जाने की कोशिश भी की गई, लेकिन वो गायब हो जाती है। ऐसी घटनाओं की वजह से  अब यहां जाने से लोग डरते हैं। कहा जाता है  कि इस महिला की मौत किसी ट्रेन से कटकर हुई थी।  42 साल स्टेशन बंद रहा। मगर भुतहा होने के सभी दावों को खारिज करने के बाद 2009 में सरकार द्वारा स्टेशन को फिर से खोला गया था।

मुंबई में स्थित मुलुंड स्टेशन पर भी आने वाले लोगों का दावा है कि अक्सर यहां शाम के बाद चीखने-चिल्लाने और रोने की आवाजें सुनाई देती हैं। लोगों का मानना है कि ये आवाजें स्टेशन पर किसी बड़ी दुर्घटना में मृत लोगों की चीख पुकार का शोर है।

चित्तूर रेलवे स्टेशन के आस-पास रहने वाले लोगों का कहना है कि एक बार स्टेशन पर हरी सिंह नाम का सी आर पी एफ का जवान ट्रेन से उतरा था। ट्रेन से उतरने के बाद हरी सिंह को आर पी एफ के जवान और एक टीटीई ने मिलकर बहुत मारा। इस हमले में उसकी मौत ही हो गई। तभी से स्टेशन के आस-पास रहने वाले लोगों ने यहां कई अजीब से घटनाक्रम महसूस किए। माना जाता है कि उसकी आत्मा ‘न्याय की तलाश में’ इस रेलवे स्टेशन पर भटकती है।

कोलकाता में रवीन्द्र सरोबर मेट्रो स्टेशन को भी भुतहा माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि रात 10:30 बजे आखिरी मेट्रो गुजरने के बाद लोगों को ट्रैक पर एक भूत जैसी आकृति दिखाई देती है। कोई नहीं जानता कि ट्रैक पर दिखने वाली आकृति किसकी है।

डोबीवली स्टेशन -ऐसा माना जाता है कि इस स्टेशन पर एक महिला की आत्मा रहती है, जो स्टेशन पर ट्रेन के आने का इंतज़ार करती देखी जाती है। कई लोगों ने बेचैनी और असुविधा महसूस करने की भी शिकायत की है। कुछ लोग ये भी दावा करते हैं कि उन्हें किसी अज्ञात चीज़ की उपस्थिति महसूस हुई है।

पंजाब के लुधियाना कहते के रेलवे स्टेशन पर सुभाष नाम के एक पूर्व कंप्यूटर रिजर्वेशन सिस्टम अधिकारी की आत्मा भटकती है। सुभाष की 2004 में मौत हो गयी थी. लोगों का कहना है कि सुभाष को अपनी नौकरी से प्यार था और मौत के बाद भी उसकी आत्मा आरक्षण केंद्र कार्यालय में घूमती है, जहां वो पहले काम करते था।

यात्रियों ने अक्सर इस स्टेशन पर अजीबो-ग़रीब अनुभव होने की शिकायत की है। ऐसा कहा जाता है कि इस स्टेशन पर एक महिला की आत्मा भटकती है, जिसकी कई साल पहले एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। कई लोग ये भी दावा करते हैं कि उन्होंने उन्हें सफेद साड़ी पहने स्टेशन पर घूमते हुए देखा है।

बड़ोग रेलवे स्टेशन हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में है। कालका-शिमला रेल रूट पर पड़ने वाला ये छोटा-सा रेलवे स्टेशन देखने में जितना खूबसूरत है, उतना ही डरावना और भूतिया माना जाता है। स्टेशन के पास ही एक बड़ोग नाम की सुरंग है। इस सुरंग का निर्माण एक ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग ने कराया था। कहते हैं कि बाद में उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। लोगों का कहना है कि उनकी आत्मा आज भी स्टेशन और सुरंग के आसपास भटकती है। कई राहगीरों ने भी कहा है कि उन्हें उसकी मौजूदगी महसूस हुई है।

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