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पत्रकार के तांत्रिक बनने का जब रहस्य खुला?

 @विनोद भगत

उन दिनों एक चर्चित भाजपा नेता के अखबार में था। काशीपुर में अखबार का एक दफ्तर खोला गया था। मेरे साथ एक अन्य पत्रकार काशीपुर के ही सहयोगी के रूप में थे।

अखबार को सही से जमाने के लिए देहरादून से संपादक जी के भतीजे भी आये कुछ दिनों के लिए। मेरे सहयोगी को पता चला कि आने वाले सज्जन अखबार के मालिक के भतीजे हैं तो वह उनका विशेष ख्याल रखने लगे। कमरे की जल्द व्यवस्था न होने की वजह से वह आफिस में ही रहने लगे।

दो एक दिन तक सब कुछ सही चला। तीसरे या चौथे दिन की बात है कि जब मैं कार्यालय पहुंचा तो संपादक जी के भतीजे काफी घबराये हुए थे। उनका चेहरा ऐसा लग रहा था कि मानो बुरी तरह डरे हुए हैं।

मैं कुछ पूछता उससे पहले ही वह डरते हुये बोले, “भगत जी, ये तो बहुत बड़ा तांत्रिक हैं। रात भर तांत्रिक क्रिया करता रहा।”

मैंने पूछा, “कौन, कौन है तांत्रिक?
उन्होंने मेरे सहयोगी का नाम लेते हुए कहा कि वह कल पूरी रात मेरे ऊपर तांत्रिक क्रिया करता रहा।
मैं आश्चर्यचकित रह गया। क्योंकि मैंने आज तक अपने इस सहयोगी के इस गुण के बारे में नहीं सुना था। फिर भी मैंने उनसे पूछा कि कैसी तांत्रिक क्रिया?

उन्होंने बताया कि रात जब वह सोये हुए थे। लाइट आफ थी। उस समय मेरा वह सहयोगी उनके शरीर के चारों ओर धूप जलाकर कोई मंत्र का जाप कर रहा था। मैं तो ईश्वर का ध्यान करते हुए चुपचाप आंखें बंद कर लेटा रहा।

वह मुझे यही बता रहे थे कि मेरा वह सहयोगी भी आफिस पहुंच गया। उसे देखते ही संपादक जी के भतीजे के चेहरे पर खौफ की लकीरें साफ दिखाई देने लगी।
मैं अपने सहयोगी से कुछ पूछता उससे पहले ही वह खुद बोल उठा, नमस्कार, कल रात तो आराम की नींद आई आपको। वो रात मच्छर बहुत थे ना, इसलिए मैंने कछुआ छाप अगरबत्ती जलाई और आपके चारों ओर उसे घुमाता रहा ताकि आपको मच्छर परेशान न करें और आप आराम से सो सकें।

मेरे सहयोगी के इतना कहते ही मेरी तो हंसी छूट उठी और संपादक जी के भतीजे के खौफजदा चेहरे पर हंसी थी या शर्मिंदगी। मैं आज तक नहीं समझ पाया।
मेरा सहयोगी सिर्फ इतना पूछ रहा था, “भगत जी, इसमें हंसने वाली क्या बात है?

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