@शब्द दूत ब्यूरो
नई दिल्ली। पीएम केयर्स फंड को लेकर उठ रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि इसका पैसा प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष या एनडीआरएफ में जमा करने की जरूरत नहीं है। लेकिन इस पीएम केयर्स फंड को लेकर पहले कई विवाद और राजनीतिक छींटाकशी भी हो चुकी है। दरअसल विवाद उस समय उठा जब जानकारी मिली कि इस फंड की जांच सीएजी नहीं कर सकता है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक अखबार की क्लिपिंग पर तंज कसते हुए कहा ‘बेईमान का अधिकार’। दरअसल अखबार की क्लिपिंग में दावा किया गया है कि पीएम केयर्स फंड के बारे में दी गई आरटीआई पर जानकारी देने से इनकार कर दिया गया है। राहुल गांधी के इस ट्वीट पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी पलटवार किया और उन्हें ‘प्रिंस ऑफ इन्कॉम्पिटेंस’ (अक्षम राजकुमार) करार दिया। नड्डा ने पलटवार करते हुए बयान जारी किया और आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने पीएम-केयर्स से संबंधित एक ‘भ्रामक’ खबर फैलाई जनता को ‘गुमराह’ करने की ‘नापाक’ कोशिश की। राहुल गांधी पर मनगढ़ंत एवं झूठी ख़बरें फैलाने का आरोप लगाते हुए नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी का करियर केवल और केवल ‘फेक न्यूज’ पर आधारित है।
वहीं इस बीच पीएम केयर्स फंड को लेकर उठे विवादों के बीच उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर कुछ सवालों के जवाब दिए हैं। जिसमें बताया गया है कि इसमें इक्ट्ठा हुए पैसे कितने हैं और इसका कहां-कहां इस्तेमाल किया गया है।
वेबसाइट में बताया गया है कि पिछली वित्तीय वर्ष 2019-20 में पीएम केयर्स फंड में 3076.62 करोड़ रुपया इकट्ठा हुआ है। बीते साल इस फंड में 39.68 लाख रुपया विदेशी करेंसी के जरिए आया। पीएम केयर्स फंड का पैसा कहां-कहां खर्च किया गया, इसकी भी जानकारी दी गई है। वेबसाइट के मुताबिक 2000 करोड़ रुपए से भारत में बने 50 हजार वेटिंलेटर देश के सरकारी अस्पतालों में बांटे गए। एक हजार करोड़ रुपये प्रवासी मजदूरों पर खर्च किए गए तथा 100 करोड़ रुपया कोविड-19 की वैक्सीन बनाने के लिए दिया गया।


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