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चिकित्सा जगत :मॉस्को में स्पाइनल कॉर्ड प्रत्यारोपण की घोषणा, लकवे के उपचार की नई संभावनाओं पर बढ़ी उम्मीद

@डॉ संतोष श्रीवास्तव

रूस की राजधानी मॉस्को में स्पाइनल कॉर्ड यानी मेरुरज्जु प्रत्यारोपण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण चिकित्सा उपलब्धि की घोषणा की गई है। मॉस्को के एन. वी. स्क्लिफोसोव्स्की रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन में चिकित्सकों ने रूस का पहला स्पाइनल कॉर्ड प्रत्यारोपण किए जाने की जानकारी दी है। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने 16 अक्टूबर 2026 को इस उपलब्धि की जानकारी सार्वजनिक की। बताया गया कि जटिल ऑपरेशन करीब 12 घंटे तक चला और इसके बाद मरीज की स्थिति अच्छी बताई गई।

यह उपलब्धि स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से पीड़ित मरीजों के उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मेरुरज्जु मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच तंत्रिका संदेशों के आदान-प्रदान में अहम भूमिका निभाती है। इसे गंभीर नुकसान पहुंचने पर मरीज को लकवा, संवेदनाओं में कमी तथा मूत्राशय और आंतों पर नियंत्रण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

स्पाइनल कॉर्ड की क्षतिग्रस्त तंत्रिकाओं को दोबारा कार्यशील बनाना आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की बड़ी चुनौतियों में शामिल है। हड्डियों, जोड़ों और कई अंगों के प्रत्यारोपण में चिकित्सा विज्ञान ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन मेरुरज्जु की जटिल तंत्रिका संरचना को पुनः स्थापित करना अब भी कठिन है।

रूसी अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन मॉस्को में विकसित किए जा रहे उन्नत प्रत्यारोपण कार्यक्रम का हिस्सा है। इस परियोजना में चीन के विशेषज्ञों का तकनीकी सहयोग भी मिलने की जानकारी दी गई है। हालांकि, ऑपरेशन में इस्तेमाल की गई तकनीक, प्रत्यारोपित ऊतक की प्रकृति और तंत्रिकाओं को दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत वैज्ञानिक जानकारी अभी सार्वजनिक विवरण में स्पष्ट नहीं है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए इस उपलब्धि का वास्तविक महत्व समझने के लिए मरीज के दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों, तंत्रिका कार्यों में सुधार और स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने की क्षमता से जुड़े आंकड़े अहम होंगे। केवल ऑपरेशन सफल होने या मरीज की शुरुआती स्थिति अच्छी होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि लकवे का स्थायी इलाज मिल गया है।

दुनिया भर में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के उपचार के लिए स्टेम सेल आधारित उपचार, तंत्रिका ऊतक पुनर्निर्माण, बायोमटेरियल स्कैफोल्ड, इलेक्ट्रिकल स्पाइनल कॉर्ड स्टिमुलेशन और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस जैसी तकनीकों पर अनुसंधान किया जा रहा है। इनका उद्देश्य क्षतिग्रस्त तंत्रिका मार्गों के कार्य में सुधार करना और मरीजों की गतिविधियों तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।

भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में सड़क दुर्घटनाओं, ऊंचाई से गिरने और अन्य गंभीर चोटों के कारण बड़ी संख्या में लोग मेरुरज्जु की चोट से प्रभावित होते हैं। ऐसे मरीजों को लंबे समय तक पुनर्वास, फिजियोथेरेपी और दैनिक गतिविधियों के लिए दूसरों की सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि भविष्य में प्रत्यारोपण और तंत्रिका पुनर्निर्माण से जुड़ी तकनीकें सुरक्षित तथा प्रभावी साबित होती हैं, तो इन मरीजों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव संभव हो सकते हैं।

फिलहाल मॉस्को में घोषित यह उपलब्धि गंभीर न्यूरोलॉजिकल चोटों के उपचार की संभावनाओं पर नए सिरे से ध्यान आकर्षित करती है। इसके वैज्ञानिक महत्व और मरीजों को होने वाले वास्तविक लाभ का आकलन विस्तृत क्लिनिकल आंकड़ों, दीर्घकालिक निगरानी और स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा के आधार पर ही किया जा सकेगा।

— लेखक काशीपुर निवासी डॉ. संतोष श्रीवास्तव जाने माने चिकित्सक हैं।

संदर्भ: एन. वी. स्क्लिफोसोव्स्की रिसर्च इंस्टीट्यूट, मॉस्को; मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन की 16 अक्टूबर 2026 की बताई गई आधिकारिक घोषणा।

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