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बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल का समय भी तय करें माता-पिता: उर्वशी दत्त बाली

@शब्द दूत ब्यूरो (27 अक्टूबर 2026)

काशीपुर। समाज सेविका एवं डी बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली ने बच्चों में बढ़ते मोबाइल के इस्तेमाल और सोशल मीडिया की लत पर चिंता जताते हुए अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल देखने का समय निर्धारित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य, पढ़ाई और करियर निर्माण के लिए मोबाइल के इस्तेमाल पर समय सीमा तय करना बेहद जरूरी है।

उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि छठी-सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे कई बार आकर्षण और भावनात्मक लगाव को सच्चा प्यार समझ बैठते हैं। इस उम्र में बच्चों की भावनाएं तेजी से विकसित होती हैं, लेकिन सही-गलत का निर्णय लेने की क्षमता अभी परिपक्व नहीं होती। ऐसे में चैटिंग, रील्स और सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने से उनकी पढ़ाई और करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को यह समझना होगा कि प्यार, मोहब्बत और सोशल मीडिया के अवसर जीवन में आगे भी मिलते रहेंगे, लेकिन बचपन और पढ़ाई के महत्वपूर्ण वर्ष दोबारा लौटकर नहीं आते। बच्चों को अपनी ऊर्जा और समय बेवजह की गतिविधियों में खर्च करने के बजाय अपने सपनों को पूरा करने, प्रतिभा निखारने और भविष्य को बेहतर बनाने में लगाना चाहिए। उनके अनुसार, जब बच्चे अपनी काबिलियत बढ़ाएंगे, तो उन्हें जीवन में सफलता और सम्मान हासिल करने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

उर्वशी दत्त बाली ने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल की समस्या के लिए अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब माता-पिता बच्चों के स्कूल जाने, ट्यूशन, खेलकूद और भोजन का समय निर्धारित करते हैं, तो मोबाइल इस्तेमाल करने का समय तय करने में भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। बच्चों को सही दिशा दिखाना और उनकी दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखना माता-पिता की जिम्मेदारी है।

उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को दिनभर मोबाइल अपने पास रखने की छूट देने के बजाय उसका इस्तेमाल निर्धारित समय पर ही करने दिया जाए। इसके लिए अभिभावक मोबाइल को सुरक्षित स्थान पर रख सकते हैं और बच्चों को प्रतिदिन केवल एक घंटे, रात 9 बजे से 10 बजे तक, मोबाइल इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकते हैं। निर्धारित समय पूरा होने के बाद मोबाइल वापस ले लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की समय सीमा बच्चों में अनुशासन विकसित करने और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मददगार हो सकती है।

उर्वशी दत्त बाली ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की मोबाइल संबंधी आदतों को लेकर अभी से गंभीर हों और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर उचित निगरानी रखें। उन्होंने कहा कि बच्चों को मोबाइल के फायदे और नुकसान समझाने के साथ ही परिवार के सदस्यों को भी उनके सामने संतुलित डिजिटल व्यवहार का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

उन्होंने चेताया कि यदि माता-पिता समय रहते बच्चों की दिनचर्या और मोबाइल इस्तेमाल को लेकर उचित कदम नहीं उठाएंगे, तो भविष्य में इसके नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। बच्चों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों को सजगता, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी होगी।

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