@शब्द दूत ब्यूरो (27 अक्टूबर 2026)
भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भराड़ीसैंण स्थित उत्तराखण्ड विधानसभा में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सेवानिवृत्त मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूड़ी का जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल रहा है। देश की रक्षा से लेकर उत्तराखण्ड के विकास तक उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री धामी ने सदन में स्वर्गीय खण्डूड़ी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि वे एक अनुशासित सैनिक, समर्पित जनसेवक और कुशल प्रशासक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि उच्च पदों पर रहते हुए भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहा जा सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बेटी के लिए उसके पिता पहले नायक होते हैं, लेकिन जनरल खण्डूड़ी केवल अपने परिवार के ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखण्ड और देश के नायक रहे। उन्होंने जीवन में जो भी जिम्मेदारी संभाली, उसे पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना में रहते हुए खण्डूड़ी ने वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपने साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया। सेना की इंजीनियरिंग सेवाओं में उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। सेना में उनका अनुशासित और समर्पित जीवन देशसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद खण्डूड़ी ने राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 1991 में वे गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए और पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। संसद में उन्होंने उत्तराखण्ड की आकांक्षाओं और पृथक राज्य की मांग को मजबूती से उठाया। उनके स्पष्ट विचारों और प्रभावशाली वक्तव्यों ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन को वैचारिक मजबूती प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में खण्डूड़ी के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही। देश में सड़क संपर्क व्यवस्था को मजबूत बनाने के उनके प्रयासों का लाभ आज भी करोड़ों लोगों को मिल रहा है।
धामी ने कहा कि वर्ष 2007 और 2011 में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के रूप में खण्डूड़ी ने पारदर्शी, अनुशासित और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था स्थापित करने के उनके प्रयास भ्रष्टाचार के प्रति उनके सख्त रुख और स्वच्छ प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उनका मानना था कि सरकार की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूड़ी की कार्यशैली में सेना का अनुशासन, प्रशासनिक दक्षता और जनता के प्रति संवेदनशीलता का अनूठा समन्वय था। उन्होंने उत्तराखण्ड की राजनीति और जनमानस में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनके व्यक्तित्व और कार्यों ने अनेक युवाओं को प्रदेश की सेवा के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उन्हें खण्डूड़ी का स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। उनका निधन प्रदेश और राष्ट्र के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके जाने से एक युग का अंत हुआ है, लेकिन उनके आदर्श, ईमानदार कार्यशैली और विकास के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महान व्यक्तित्व अपने कार्यों और आदर्शों के माध्यम से सदैव लोगों के हृदय में जीवित रहते हैं। स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी का राष्ट्रसेवा, जनसेवा और उत्तराखण्ड के विकास में दिया गया योगदान प्रदेश की स्मृतियों में हमेशा बना रहेगा।
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