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युवाओं के JOSH से बनेगा टीबी मुक्त उत्तराखंड

@शब्द दूत ब्यूरो (08 अक्टूबर 2026)

टीबी मुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने और युवाओं को क्षय रोग उन्मूलन अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ने की दिशा में JOSH (Joint Squad for Health) कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। कार्यक्रम का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा की उपस्थिति में किया गया। उत्तराखंड ने भी इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड की ओर से कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की गई।

JOSH कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं की ऊर्जा, जागरूकता और सामाजिक भागीदारी को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ना है, ताकि बीमारी के प्रति सही जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जा सके। इसके तहत युवाओं को टीबी के लक्षणों की पहचान करने, संभावित मरीजों को समय पर जांच के लिए प्रेरित करने और मरीजों को उपचार नियमित रूप से पूरा करने के लिए जागरूक करने की भूमिका से जोड़ा जाएगा।

टीबी केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं है, बल्कि इससे सामाजिक भ्रांतियां और कलंक भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में युवाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने, गलत धारणाओं को दूर करने और टीबी मरीजों के प्रति सकारात्मक सामाजिक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर JOSH कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की गई। इस अवसर पर ग्रामीण स्वास्थ्य सलाहकार एवं अनुश्रवण परिषद, उत्तराखंड सरकार के उपाध्यक्ष नितिन गौतम, मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तराखंड डॉ. संदीप तिवारी, निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. शिखा जंगपांगी, राज्य टीबी अधिकारी डॉ. महेश खेतान, संयुक्त निदेशक एनसीसी, संयुक्त निदेशक माय भारत सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान टीबी उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे प्रयासों, युवाओं की भूमिका और जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी बीमारी के उन्मूलन के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी सोच के साथ JOSH के जरिए युवाओं को टीबी के खिलाफ जागरूकता अभियान से जोड़ने की पहल की गई है।

कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को टीबी के सामान्य लक्षणों के बारे में जागरूक किया जाएगा। लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख में कमी और कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने का संदेश दिया जाएगा। संभावित मरीजों को बीमारी छिपाने के बजाय तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग का जोर उपचार के दौरान दवाओं का नियमित सेवन सुनिश्चित करने पर भी है। मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पूरा उपचार लेने और बीच में दवा नहीं छोड़ने के लिए जागरूक किया जाएगा। युवाओं की भूमिका मरीजों और उनके परिवारों को उपचार पूरा करने के महत्व की जानकारी देने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

टीबी के खिलाफ लड़ाई में बीमारी से जुड़ी भ्रांतियां और सामाजिक भेदभाव भी बड़ी चुनौती हैं। जानकारी के अभाव में कई लोग बीमारी को लेकर भय और गलत धारणाओं का शिकार हो जाते हैं। इससे मरीज बीमारी छिपा सकता है और समय पर जांच व उपचार नहीं करा पाता। JOSH के माध्यम से युवाओं को यह संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए सक्रिय किया जाएगा कि टीबी एक उपचार योग्य बीमारी है और समय पर जांच तथा पूरा उपचार लेने से इससे स्वस्थ हुआ जा सकता है।

स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और समुदायों तक टीबी से संबंधित सही जानकारी पहुंचाने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए भी जागरूकता संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

कार्यक्रम में समय पर जांच, नियमित उपचार और जनभागीदारी को टीबी उन्मूलन अभियान के महत्वपूर्ण आधार के रूप में रेखांकित किया गया। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और भौगोलिक रूप से विविध राज्य में दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता गतिविधियों की पहुंच सुनिश्चित करना विशेष महत्व रखता है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवी समूहों की भागीदारी टीबी से संबंधित संदेश को घर-घर तक पहुंचाने में प्रभावी हो सकती है।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक संकल्प लिया। समय पर जांच कराने, नियमित उपचार को बढ़ावा देने तथा टीबी से जुड़ी भ्रांतियों और सामाजिक भेदभाव को दूर करने में सहयोग देने की शपथ ली गई।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि टीबी मुक्त उत्तराखंड और टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। आम नागरिकों, युवाओं, स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की संयुक्त भागीदारी जरूरी है। JOSH कार्यक्रम इसी सामूहिक भागीदारी को मजबूत करने का माध्यम बनेगा।

कार्यक्रम में इस संदेश के साथ टीबी मुक्त उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प लिया गया कि “टीबी हारेगा-भारत जीतेगा, युवाओं के JOSH से बनेगा टीबी मुक्त उत्तराखंड।”

 

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