अमेरिका के मध्यावधि चुनाव ने न सिर्फ अमेरिका का राजनीतिक भूगोल बदला है बल्कि पूरी दुनिया के राजनीतिक परिदृश्य पर भी असर डाला है.लेकिन अअमेरिका इस तरह की राजनीतिक सूनामियों का मुकाबला करने का आदी हो चुका है.
ट्रंप के साथ 2026 के मध्यावधि चुनाव में जो नीली लहर की वजह से बड़ा उलटफेर हुआ, वैसा कई अन्य राष्ट्रपतियों के साथ भी हो चुका है।
2026 में क्या हुआ?
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच (नवंबर 2026) मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स ने दोनों सदनों (हाउस और सीनेट) का नियंत्रण छीन लिया। रिपब्लिकन पार्टी को टेक्सास, कंसास, साउथ कैरोलिना जैसे गढ़ों में भी सीटें गंवानी पड़ीं। इसे ट्रंप और उनकी एजेंडा के खिलाफ “ऐतिहासिक उलटफेर या “नीली सुनामी ‘ कहा जा रहा है।
अमेरिका में हुए ताजा उलटफेर का अतीत खंगाला तो पता चला कि मध्यवधि चुनाव की वजह से बिना नख-दंत के होने वाले डोना ट्रंप कोई पहले राष्ट्रपति नहीं हैं.इतिहास में कितने ही राष्ट्रपतियों के साथ ऐसा हुआ?
अमेरिका का अतीत बताता है कि अमेरिका में सत्तारूढ राष्ट्रपति की पार्टी मध्यावधि चुनाव में ज्यादातर सीटें गंवाती है। 1946 से 2022 तक 20 मध्यावधि चुनावों में से 18 में राष्ट्रपति की पार्टी ने हाउस की सीटें खोईं ।लेकिन ट्रंप की भांति दोनों सदन एक साथ गंवाने के मामले कम हैं।
सीनेट और हाउस आफ रिप्रिजेंटिव्हस दोनों सदन एक साथ गंवाने वाले प्रमुख मामले ग्रोवर क्लीवलैंड (1894) के जमाने से होते आए हैं.19118 में वुडरो विल्सन,1946 में हैरी ट्रूमैन बड़े नुकसान का सामना कर चुके थे.1954 में ड्वाइट आइजनहावर 1994 में बिल क्लिंटन 2006 में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के साथ भी यही सब हुआ जो 2026 में डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुआ. फेरबदल की ये 7वीं सुनामी कही जा सकती है.
अमेरिका की राजनीति में ट्रंप की तरह बड़े नुकसान वाले अनेक उदाहरण मौजूद हैं.मुझे याद है कि 2010 में बराक ओबामा ने हाउस में 63-64 सीटें गंवाईं थीं जो सबसे बड़े आधुनिक नुकसान में से एक घटना है.।1994 में बिल क्लिंटन ने 54 हाउस सीटें खो दी थीं.।
ट्रंप खुद अपने पहले कार्यकाल 2018) में हाउस में ~40-42 सीटें गंवा कर , नियंत्रण खो चुके हैं.
इतिहास गवाह है कि 1958 में आइजनहावर 1974 में , फोर्ड,1946 में ट्रूमैन आदि में भी बड़े नुकसान झेले.पद पर रहकर बढत हासिल करने के अपवाद बहुत कम हैं — जैसे 1998 में क्लिंटन 1998 और 2002 में बुश की पार्टी ने सीटें बढ़ाईं थीं.
लब्बोलुआब ये कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति की पार्टी का नुकसान आम बात है लेकिन दोनों सदन एक साथ गंवाना दुर्लभ है, अमेरिका के ताजे उलटफेर का असर दुनिया की राजनीति,युद्ध,व्यापार,विदेशनीति,पर्यावरण,बाजार सब पर पडता है.अमेरिका की सरपरस्ती में राज करने वाली सरकारें भी इसस प्रभावितहोतीहैं.भारत,इजराइल,ईरान,पाकिस्तान ट्रंप के नख दंत विहीन होने से प्रभावित हुए नहीं रह सकते.
ट्रंप के साथ जो हुआ उसमें अप्रत्याशित कुछ भी नहीं है.ये तो होना ही था.इसे कोई रोक नहीं सकता था,खुद ट्रंप भी.हकीकत ये है कि ट्रंप साहब आत्ममुग्धता के शिकार हो गए थे.वे अखिल विश्व के सम्राट बनने का ख्वाब देख रहेथे.वेनेजुएला,ईरान,फिलिस्तीन के साथ ट्रंप ने जो किया वो किसी से छिपा नहीं है.
कभी कभी मुझे लगता है कि ट्रंप साहब की संगत में रहकर हमारे प्रधानमंत्री जी भी किसी सनक का शिकार हैं.भविष्य में कहीं उनके साथ भी यही सब न हो जो ट्रंप के साथ हुआ.आने वाले कुछ महीनों में अमेरिका की नीलाभ सुनामी का असर दिखाई देने लगेगा.