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काशीपुर का फ्लाईओवर बना सवालों का पुल, बार-बार मरम्मत से जनता परेशान; बगैर उद्घाटन के शुरू हुआ भारत का एकमात्र करोड़ों का निर्माण, अनोखा रिकॉर्ड

@विनोद भगत

काशीपुर। शहर के महाराणा प्रताप चौक यानी एमपी चौक पर बना फ्लाईओवर जिस उम्मीद के साथ तैयार किया गया था, वह उम्मीद अब बार-बार होने वाली मरम्मत, यातायात अव्यवस्था और सवालों के बीच उलझती नजर आ रही है। कभी निर्माण में देरी को लेकर चर्चा में रहा यह आरओबी अब अपनी बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं और मरम्मत के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ताजा स्थिति यह है कि एक्सपेंशन ज्वाइंट की मरम्मत के लिए 4 से 9 अक्टूबर तक फ्लाईओवर को बंद रखा गया है। इसके चलते यातायात को डायवर्ट करना पड़ा और शहर को एक बार फिर जाम तथा आवागमन की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, इस फ्लाईओवर की कहानी केवल इसके बनने के बाद की परेशानी तक सीमित नहीं है। इसका निर्माण शुरू होने के बाद लंबे समय तक काम चलता रहा और समय सीमा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। वर्ष 2018 में काशीपुर के बाजपुर रोड पर रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर आरओबी की आधारशिला रखे जाने के बाद इसके निर्माण को पूरा होने में अपेक्षा से कहीं अधिक समय लगा। वर्ष 2023 में भी इसके निर्माण की समय सीमा कई बार आगे बढ़ने की खबरें सामने आई थीं।

फ्लाईओवर बनकर तैयार हुआ तो लोगों को उम्मीद थी कि अब रेलवे क्रॉसिंग और शहर के प्रमुख मार्ग पर जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होगी। लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद भी समस्याओं ने पीछा नहीं छोड़ा। वर्ष 2025 में एमपी चौक स्थित आरओबी के टी-ज्वाइंट का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन को भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगानी पड़ी थी और मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी। एनएचएआई से पुल का डिजाइन और संबंधित दस्तावेज भी मांगे गए थे।

इसके बाद भी फ्लाईओवर की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। अब अक्टूबर 2026 में एक बार फिर एक्सपेंशन ज्वाइंट की मरम्मत के लिए इसे पांच दिन तक बंद करना पड़ा है। यानी जिस संरचना से शहर को निर्बाध यातायात की उम्मीद थी, वही संरचना समय-समय पर यातायात रोकने का कारण बन रही है। सवाल स्वाभाविक है कि आखिर बार-बार मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ रही है और क्या हर बार मरम्मत ही स्थायी समाधान है?

इस पूरे मामले का दूसरा पहलू फ्लाईओवर के दोनों ओर की सर्विस रोड और जल निकासी व्यवस्था है। सितंबर 2025 में महापौर दीपक बाली ने फ्लाईओवर के दोनों ओर टूट चुकी सर्विस रोड और नालों की समस्या को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना था कि सर्विस रोड की खराब स्थिति के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है और नालों की व्यवस्था ठीक न होने से जलभराव की समस्या भी सामने आती है।

यही स्थिति काशीपुर आने वाले लोगों के लिए भी चिंता का विषय है। एमपी चौक शहर का महत्वपूर्ण यातायात बिंदु है। यहां से स्थानीय नागरिकों के अलावा आसपास के क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले लोग भी गुजरते हैं। अक्टूबर 2026 में आरओबी की खराब स्थिति को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताते हुए इसके जल्द रखरखाव और मरम्मत की मांग भी उठाई गई।

फ्लाईओवर को लेकर एक दिलचस्प और कटाक्ष भरा सवाल भी शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत में आम तौर पर किसी बड़े सार्वजनिक निर्माण का उद्घाटन राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर पूरे समारोह के साथ किया जाता है। सड़क हो, पुल हो, भवन हो या कोई दूसरी बड़ी परियोजना—उद्घाटन के लिए जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की मौजूदगी अक्सर दिखाई देती है। लेकिन काशीपुर का यह फ्लाईओवर इस मायने में अलग दिखाई देता है। स्थानीय चर्चा में इसे मजाकिया अंदाज में ऐसा फ्लाईओवर कहा जा रहा है, जिसका किसी मंत्री के हाथों विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ।

हालांकि, इसे भारत का पहला ऐसा स्ट्रक्चर कहना कि जिसका किसी मंत्री ने उद्घाटन नहीं किया, एक स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में उपलब्ध स्रोतों से पुष्ट नहीं होता। इसलिए इसे पोर्टल पर तथ्य के बजाय स्थानीय चर्चा और व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उचित होगा। असली मुद्दा उद्घाटन से कहीं बड़ा है—जनता यह जानना चाहती है कि जिस परियोजना पर सार्वजनिक धन खर्च हुआ, उसकी गुणवत्ता, टिकाऊपन और रखरखाव की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

विडंबना यह भी है कि जिस फ्लाईओवर को लेकर कभी निर्माण पूरा होने की तारीखों का इंतजार किया गया, वही अब निर्माण पूरा होने के बाद मरम्मत की तारीखों के कारण चर्चा में है। पहले सवाल था कि पुल कब बनेगा, अब सवाल यह है कि पुल कब बंद होगा और अगली मरम्मत कब करनी पड़ेगी।

किसी भी बड़े सार्वजनिक ढांचे की सफलता केवल उसके बन जाने से तय नहीं होती। उसकी असली परीक्षा तब होती है जब वह वर्षों तक बिना बार-बार बड़ी तकनीकी समस्या के जनता की सेवा करे। पुल का निर्माण पूरा होना पहला चरण है, उसकी गुणवत्ता, संरचनात्मक मजबूती, जल निकासी, सर्विस रोड, एक्सपेंशन ज्वाइंट और नियमित रखरखाव उसके बाद की उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।

काशीपुर के लोगों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस फ्लाईओवर की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा। क्या हर बार किसी हिस्से के खराब होने के बाद उसकी मरम्मत की जाएगी या एक बार विशेषज्ञों से इसकी समग्र तकनीकी जांच कराकर मूल समस्या का पता लगाया जाएगा? क्या निर्माण एजेंसी, निगरानी तंत्र और रखरखाव की जिम्मेदारी तय होगी? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या जनता को यह बताया जाएगा कि बार-बार सामने आ रही खराबियों की वास्तविक वजह क्या है?

काशीपुर को ऐसे फ्लाईओवर की जरूरत है जो शहर की यातायात व्यवस्था को आसान बनाए, न कि ऐसा ढांचा जिसकी मरम्मत स्वयं शहर के लिए यातायात संकट बन जाए। उद्घाटन किसने किया या नहीं किया, यह भले ही राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय हो सकता है, लेकिन जनता के लिए असली उद्घाटन तभी माना जाएगा जब यह फ्लाईओवर लंबे समय तक सुरक्षित, मजबूत और निर्बाध रूप से यातायात की सुविधा देता दिखाई दे। फिलहाल काशीपुर की जनता का सवाल सीधा है—फ्लाईओवर बार-बार मरम्मत क्यों मांग रहा है और इसका स्थायी इलाज कब होगा?

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