@शब्द दूत ब्यूरो (04 अक्टूबर 2026)
काशीपुर। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने रविवार को काशीपुर में उत्तराखंड महक क्रांति नीति 2026-36 के तहत सगन्ध पौधा केन्द्र, परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान (पारडी) की ओर से आयोजित कृषक गोष्ठी एवं महक प्रचार रथ रवानगी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कृषि यंत्रीकरण योजना के अंतर्गत लाभार्थी किसानों को चेक वितरित किए और मिंट की खेती के प्रचार-प्रसार के लिए महक प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में किसानों ने सगन्ध खेती से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पारडी संस्थान की स्थापना के बाद वर्ष 2003 से अब तक प्रदेश के 109 एरोमा क्लस्टरों में 29,921 किसान लगभग 9,866 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लेमनग्रास, डैमस्क रोज, मिंट, सिनेमन सहित विभिन्न सगन्ध फसलों की खेती कर रहे हैं। किसानों के खेतों में ही प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न क्लस्टरों में 200 आसवन संयंत्र लघु उद्यम के रूप में संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सगन्ध सेक्टर का कारोबार 120 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले दो दशकों में सगन्ध क्षेत्र में मिली सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने सगन्ध फसलों के बड़े स्तर पर कृषिकरण और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तराखंड महक क्रांति नीति 2026-2036 लागू की है। नीति के प्रथम चरण में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 22,750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सात एरोमा वैली विकसित की जाएंगी, जिससे करीब 91 हजार किसान लाभान्वित होंगे।
नीति के तहत चमोली एवं अल्मोड़ा में डैमस्क रोज वैली, पिथौरागढ़ में तिमूर वैली, ऊधमसिंह नगर में मिंट वैली, चंपावत एवं नैनीताल में सिनेमन वैली, हरिद्वार में लेमनग्रास-मिंट वैली तथा पौड़ी में लेमनग्रास वैली विकसित की जाएगी।
गणेश जोशी ने कहा कि महक क्रांति नीति की शुरुआत ऊधमसिंह नगर जिले में मिंट की खेती से की जा रही है। जिले में 8,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मिंट वैली विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे करीब 32 हजार किसान लाभान्वित होंगे। चालू वित्तीय वर्ष में 300 हेक्टेयर भूमि पर मिंट की खेती का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि नीति का उद्देश्य केवल सगन्ध फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन से जोड़ना है। महक प्रचार वाहनों के माध्यम से गांव-गांव और किसान-किसान तक मिंट की वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन, आसवन, गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाएगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ खेती की लागत कम करना, उत्पादन एवं गुणवत्ता बढ़ाना, बेहतर मूल्य दिलाना और फसल जोखिम को कम करते हुए किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि करना है।
उन्होंने कहा कि काशीपुर का एरोमा पार्क भी इसी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का प्रयास है कि मिंट सहित सभी सगन्ध फसलों का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन प्रदेश में ही हो तथा किसानों को उद्योग और बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि मेन्था प्रोसेसिंग की एक बड़ी यूनिट एरोमा पार्क, काशीपुर में प्रारंभ हो चुकी है।
गणेश जोशी ने मिंट किसानों से पारडी संस्थान द्वारा कराई जा रही वैज्ञानिक खेती को अपनाने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने और विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मिंट केवल एक फसल न रहे, बल्कि किसान की आय, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बने। उन्होंने महक प्रचार रथ अभियान को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम में काशीपुर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, राज्यमंत्री अनुराधा वालिया, सचिव कृषि एस.एन. पांडेय, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव, निदेशक पारडी संस्थान डॉ. नृपेन्द्र चौहान, निदेशक कृषि दिनेश कुमार, निदेशक उद्यान आर.के. सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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