@शब्द दूत ब्यूरो (21 सितंबर 2026)
काशीपुर। पिछले तीन दिनों से जीएसटी विभाग और व्यापारियों के बीच चल रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए सोमवार को नगर निगम कार्यालय में महापौर दीपक बाली की मध्यस्थता में लंबी बैठक आयोजित की गई। बैठक में जीएसटी विभाग की ओर से डिप्टी कमिश्नर वीर सिंह और सहायक कमिश्नर मितेश्वरानंद सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। वहीं विभिन्न व्यापार मंडलों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में व्यापारी भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में व्यापारियों ने जीएसटी विभाग द्वारा पिछले दिनों प्रतिष्ठानों पर किए जा रहे स्पॉट वेरिफिकेशन और सर्वे को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। व्यापारियों का कहना था कि विभागीय अधिकारियों के प्रतिष्ठानों पर पहुंचने से व्यापारियों के बीच भय और बाजार में गलत संदेश जाने की स्थिति बन रही है। व्यापारियों ने मांग रखी कि जिन व्यापारियों के टैक्स भुगतान अथवा इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर विभाग को कोई संदेह है, उन्हें पहले व्यक्तिगत रूप से विभागीय कार्यालय में बुलाकर स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाए।
डिप्टी कमिश्नर वीर सिंह ने बैठक में स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य किसी व्यापारी को परेशान करना अथवा उसे गलत तरीके से टैक्स के दायरे में लाना नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यापारी और विभाग दोनों को कानून के दायरे में रहकर काम करना है। उन्होंने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि किसी भी व्यापारी को बिना वजह परेशान नहीं किया जाएगा।
वीर सिंह ने बताया कि पिछले दिनों जिन व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर स्पॉट वेरिफिकेशन किया गया, उनका चयन विभाग द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया गया था। उन्होंने कहा कि विभाग के रिकॉर्ड में ऐसे कई व्यापारी सामने आए हैं जिन्होंने लंबे समय से बहुत कम अथवा नगण्य कैश टैक्स जमा किया है, जबकि उनके रिकॉर्ड में इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि दिखाई दे रही है। ऐसे मामलों में विभाग के लिए यह देखना आवश्यक हो जाता है कि संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट के अनुरूप वास्तविक स्टॉक उपलब्ध है या नहीं।
उन्होंने कहा कि स्पॉट वेरिफिकेशन का उद्देश्य प्रतिष्ठान के अस्तित्व, कारोबार और स्टॉक आदि की वास्तविक स्थिति की जांच करना है। उन्होंने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसे छापेमारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि किसी प्रतिष्ठान पर अधिकारियों और वाहनों के पहुंचने से व्यापारी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
बैठक में व्यापारियों ने इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर भी कई सवाल उठाए। व्यापारियों का कहना था कि कई मामलों में उनके पास रिकॉर्ड में आईटीसी उपलब्ध है, लेकिन बाजार की परिस्थितियों, ऑनलाइन कारोबार में बढ़ोतरी और स्टॉक की वास्तविक स्थिति के कारण टैक्स भुगतान को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारियों ने कहा कि कंपनियों की डीलरशिप बनाए रखने के लिए उन्हें पर्याप्त स्टॉक रखना पड़ता है, जबकि उसकी बिक्री हमेशा उसी अनुपात में नहीं हो पाती।
व्यापारियों ने यह भी कहा कि जीएसटी कानून की कई तकनीकी जानकारियां उन्हें स्वयं पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और वे अपने सीए अथवा टैक्स कंसलटेंट की सलाह पर काम करते हैं। ऐसे में विभाग और व्यापारियों के बीच जागरूकता एवं संवाद के लिए कार्यशाला आयोजित करने की मांग रखी गई।
बैठक में इस सुझाव पर सहमति बनी कि जीएसटी विभाग की ओर से व्यापारियों के लिए एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें जीएसटी अधिकारी, सीए, जीएसटी मामलों के अधिवक्ता और व्यापार मंडल की ओर से आमंत्रित विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यशाला में इनपुट टैक्स क्रेडिट, टैक्स भुगतान, रिटर्न दाखिल करने तथा अन्य जीएसटी संबंधी विषयों पर व्यापारियों की शंकाओं का समाधान किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने कार्यशाला को एक सप्ताह से दस दिन के भीतर आयोजित करने की बात कही।
महापौर दीपक बाली ने कहा कि व्यापारी और जीएसटी विभाग दोनों ही नियमों के अनुसार कार्य करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि विवाद का मुख्य कारण संवाद की कमी और कुछ नियमों को लेकर बनी गलतफहमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन व्यापारियों के संबंध में विभाग को टैक्स भुगतान में कमी अथवा आईटीसी से जुड़ी विसंगति दिखाई दे रही है, उन्हें पहले व्यक्तिगत स्तर पर कार्यालय में बुलाकर समझाया जाए।
महापौर ने कहा कि यदि किसी व्यापारी को विभागीय स्तर पर कोई समस्या है तो वह सीधे अधिकारियों से संपर्क कर सकता है। उन्होंने अधिकारियों से यह भी अनुरोध किया कि आगामी त्योहारी और व्यापारिक सीजन को देखते हुए प्रतिष्ठानों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचा जाए और जरूरत पड़ने पर व्यापारियों को कार्यालय में बुलाकर मामले का समाधान किया जाए।
व्यापार मंडल की ओर से भी बैठक में कहा गया कि व्यापारी नियमों के अनुसार टैक्स देने के लिए तैयार हैं। यदि किसी व्यापारी से टैक्स भुगतान में गलती या कमी हुई है तो उसे सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए। व्यापार मंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यापारी द्वारा नियमों के बावजूद टैक्स का भुगतान नहीं किया जाता है तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई का विरोध नहीं किया जाएगा।
बैठक में विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि व्यापारी द्वारा जीएसटी के कैश लेजर में जमा की गई राशि उसके खाते में ही रहती है। विभाग उस राशि को अपनी ओर से उपयोग नहीं करता और नियमानुसार व्यापारी द्वारा उसका उपयोग किया जा सकता है। इस मुद्दे को लेकर व्यापारियों में बनी कुछ भ्रांतियों को भी बैठक में दूर किया गया।
डिप्टी कमिश्नर वीर सिंह ने व्यापारियों से अपील की कि वे अपने सीए, अधिवक्ता अथवा टैक्स कंसलटेंट के साथ बैठकर अपने कारोबार, स्टॉक, आईटीसी और टैक्स देनदारी की स्थिति की समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यापारी से गलती हुई है तो उसे समय रहते सुधार लेना भविष्य में बड़ी देनदारी और ब्याज से बचने में सहायक हो सकता है।
बैठक में अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यापारी को लगता है कि विभागीय कार्रवाई अथवा किसी अधिकारी के व्यवहार को लेकर समस्या है तो वह वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकता है। अधिकारियों और व्यापारियों के बीच संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
बैठक के बाद व्यापारियों ने इसे सकारात्मक पहल बताया। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने महापौर दीपक बाली की मध्यस्थता के लिए आभार जताते हुए कहा कि बातचीत के माध्यम से गतिरोध दूर करने का रास्ता निकला है। साथ ही व्यापारियों ने आगामी त्योहारी सीजन के दौरान दुकानों पर सर्वे से बचने का अनुरोध दोहराया।
बैठक में बनी सहमति के अनुसार फिलहाल काशीपुर में इस प्रकार के मामलों को लेकर व्यापारियों को व्यक्तिगत स्तर पर विभागीय कार्यालय बुलाकर उनकी स्थिति समझने और आवश्यक सुधार का अवसर देने पर जोर रहेगा। वहीं जीएसटी नियमों के पालन, सही टैक्स भुगतान और इनपुट टैक्स क्रेडिट की वास्तविक स्थिति को लेकर प्रस्तावित कार्यशाला के माध्यम से व्यापारियों को जानकारी दी जाएगी।
महापौर दीपक बाली ने कहा कि व्यापारियों और विभाग के बीच संवाद का यह सिलसिला आगे भी जारी रहना चाहिए, ताकि कानून का पालन भी हो और व्यापारियों के बीच अनावश्यक भय का माहौल भी न बने। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने आपसी संवाद और नियमों के अनुसार आगे बढ़ने पर सहमति जताई।
व्यापार मंडल के कुमांऊ प्रभारी अश्विनी छाबड़ा, व्यापारी नेता व पार्षद गुरविंदर सिंह चंडोक, राजीव परनामी समेत तमाम व्यापारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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