@शब्द दूत ब्यूरो (20 सितंबर 2026)
काशीपुर। संत निरंकारी मिशन के 79वें वार्षिक संत समागम की सेवाओं का शुभारम्भ श्रद्धा, समर्पण और सेवाभाव से परिपूर्ण वातावरण में हुआ। आगामी 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा, हरियाणा में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन सान्निध्य में आयोजित होने वाले इस संत समागम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है।
समागम की तैयारियों के अंतर्गत सेवा कार्यों का शुभारम्भ निरंकारी राजपिता रमित जी के कर-कमलों से किया गया। इस अवसर पर संत निरंकारी मिशन की कार्यकारिणी समिति, केंद्रीय सेवादल के अधिकारीगण और हजारों श्रद्धालु भक्तों ने सेवा में सहभागिता निभाई। संत निरंकारी मण्डल की अध्यक्ष राजकुमारी ‘मामी जी’ तथा संत निरंकारी मण्डल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर निरंकारी राजपिता का अभिनंदन किया।
सेवा शुभारम्भ के अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए निरंकारी राजपिता रमित जी ने सतगुरु माता जी का प्रेम एवं आशीर्वाद संतों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि संत समागम की विशाल सेवाएं असंख्य संतों की निस्वार्थ सेवा, त्याग और समर्पण का परिणाम हैं। सेवा का वास्तविक भाव तभी प्रकट होता है, जब जीवन से ‘मैं’ का भाव समाप्त होकर ‘हम’ का भाव उत्पन्न होता है। मानव जीवन केवल स्वयं तक सीमित रहने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के सुख-दुःख में सहभागी बनने और मानवता की सेवा करने के लिए मिला है।
उन्होंने कहा कि सतगुरु का ज्ञान मनुष्य की दृष्टि को बदलने वाली जागृति है, जो प्रत्येक मानव में निरंकार का स्वरूप देखने की प्रेरणा देता है। जब मनुष्य दूसरे मनुष्य से प्रेम और सत्कार करेगा, तभी समाज और धरती अधिक सुंदर बन सकेगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने कर्मों और व्यवहार के माध्यम से सच्ची मानवता को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
इस वर्ष संत समागम का शीर्षक ‘जागृति’ रखा गया है। यह विषय मनुष्य को बाहरी संसार से आगे बढ़कर अपने भीतर झांकने, अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने तथा प्रत्येक क्षण सजग और सचेत रहने की प्रेरणा देता है। सतगुरु माता जी के संदेश के अनुसार जागरूक और चेतन भक्त हर पल भक्ति से जुड़े रहते हैं। संसार में रहते हुए भी उसके प्रभावों से स्वयं को बचाए रखना और हर परिस्थिति में प्रभु-स्मरण से जुड़े रहना ही सच्ची जागृति का भाव है।
संत निरंकारी मिशन के अनुसार संत समागम किसी धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र तक सीमित न होकर मानवता और सत्य के संदेश को आगे बढ़ाने वाला आध्यात्मिक संगम है। सेवा के माध्यम से इंसानियत और आध्यात्मिकता का भाव यहां देखने को मिलता है। हजारों हाथ सेवा में और लाखों हृदय प्रेम के भाव में जुड़कर विविधता में एकता का संदेश प्रस्तुत करते हैं।
इसी क्रम में काशीपुर क्षेत्र से भी अनेक सेवादार संत समागम की सेवाओं में सहभागिता के लिए समालखा, हरियाणा के लिए रवाना हुए हैं। सेवादार श्रद्धा, निष्ठा और सेवाभाव के साथ समागम की विभिन्न व्यवस्थाओं में अपना योगदान देंगे। यह जानकारी प्रकाश खेड़ा द्वारा दी गई।
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