@विनोद भगत
नैनीताल। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाताओं को भेजे जा रहे नोटिसों को लेकर लोगों में फैल रही भ्रम और चिंता की स्थिति पर नैनीताल के अपर जिलाधिकारी (एडीएम) विवेक राय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का अर्थ किसी भी स्थिति में मतदाता सूची से नाम काटा जाना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल अभिलेखों में मौजूद विसंगतियों को दूर करने और पात्र मतदाताओं का नाम सही रूप से दर्ज करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
एडीएम विवेक राय ने बताया कि वर्तमान में SIR का तीसरा चरण चल रहा है। पहले चरण में वर्ष 2003 की मतदाता सूची का वर्तमान मतदाता सूची से मिलान (मैपिंग) किया गया था, जिसमें लगभग 90 प्रतिशत मतदाता सफलतापूर्वक मैप हो गए। शेष 10 प्रतिशत मतदाताओं के सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में 25 से 30 प्रतिशत ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें नाम, जन्मतिथि या अन्य विवरणों में अंतर पाया गया है। इन विसंगतियों को ठीक करने के उद्देश्य से संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं।
एडीएम विवेक राय ने कहा कि यदि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में किसी मतदाता के नाम के साथ उपनाम (जैसे सिंह, तिवारी, पाल, चतुर्वेदी आदि) नहीं था और वर्तमान सूची में जुड़ गया है, जन्मतिथि में अंतर है, पिता और मतदाता की आयु में 15 वर्ष से कम का अंतर है, दादा और मतदाता की आयु में 40 वर्ष से कम का अंतर है अथवा एक ही व्यक्ति से छह से अधिक मतदाताओं की मैपिंग हुई है, तो ऐसी स्थिति में सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस मिलने का उद्देश्य किसी को गलत ठहराना नहीं, बल्कि सही अभिलेखों के आधार पर मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करना है। इसके लिए निर्वाचन आयोग ने 12 प्रकार के दस्तावेज मान्य किए हैं। इनमें सरकारी अथवा सार्वजनिक उपक्रम का पहचान पत्र, पेंशन संबंधी दस्तावेज, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, जाति प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर, भू-अधिकार संबंधी दस्तावेज सहित अन्य प्रमाणपत्र शामिल हैं।
एडीएम विवेक राय ने बताया कि आधार कार्ड भी दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन चूंकि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, इसलिए इसके साथ आयोग द्वारा मान्य अन्य किसी एक दस्तावेज को भी प्रस्तुत करना होगा।
एडीएम विवेक राय ने सभी मतदाताओं से अपील की कि वे नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं, बल्कि निर्धारित तिथि पर अपने बीएलओ (BLO), सुपरवाइजर, ईआरओ (ERO) अथवा अतिरिक्त ईआरओ से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से बीएलओ, पटवारी और ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को भी लोगों की सहायता के लिए लगाया गया है, ताकि सत्यापन की प्रक्रिया सरलता से पूरी हो सके।
उन्होंने कहा कि SIR का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो व्यक्ति मतदाता बनने की पात्रता रखता है, उसका नाम हर हाल में निर्वाचक नामावली में बना रहे और जो अपात्र है, उसका नाम नियमानुसार हटाया जाए। इसलिए सभी नागरिक इस प्रक्रिया में सहयोग करें और किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम पर ध्यान न दें।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal