@शब्द दूत ब्यूरो (01 अगस्त 2026)
हरिद्वार। उत्तराखंड में सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण और अवैध मजारों को हटाने का अभियान जारी है, लेकिन इसी बीच राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग में कथित अवैध मजारों के बने रहने को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जिस टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को जीप से उतरने या पैदल चलने तक की अनुमति नहीं होती, वहां अवैध संरचनाएं खड़ी हो गईं और कुछ स्थानों पर खादिमों द्वारा दुकानें संचालित किए जाने की भी शिकायतें सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि हरिद्वार के ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया से लगे राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कई ऐसी कथित अवैध मजारें मौजूद हैं, जहां लोगों का दोपहिया और चारपहिया वाहनों से आना-जाना जारी है। यह क्षेत्र हरकी पैड़ी के भी काफी निकट माना जाता है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि कड़ी सुरक्षा वाले वन क्षेत्र में इस तरह के निर्माण और गतिविधियां आखिर कैसे संचालित होती रहीं।
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि वर्षों से सरकारी वन भूमि, रिजर्व फॉरेस्ट, वन्यजीव अभयारण्यों और टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में अतिक्रमण होते रहे, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रही है। इसी अभियान के दौरान पहले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में भी कथित अवैध मजारों का मामला सामने आया था, जिसके बाद वहां कार्रवाई की गई। सरकार का दावा है कि राज्यभर में 596 अवैध मजारों को हटाया गया, जिनमें किसी प्रकार के मानवीय अवशेष नहीं मिले।
हालांकि राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग में मौजूद कथित अवैध मजारों पर अब तक कार्रवाई न होने को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इस मामले से जिला प्रशासन भी अवगत है और हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित द्वारा भी राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन को इसकी जानकारी दी जा चुकी है।
इस संबंध में पार्क प्रशासन का कहना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और संबंधित क्षेत्र पर अदालत का स्थगन आदेश (स्टे) लागू है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि न्यायालय में विभाग ने क्या पक्ष रखा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई में देरी के कारण पहले जहां एक संरचना थी, वहीं अब आसपास अन्य निर्माण भी खड़े हो गए हैं और वन भूमि पर अतिक्रमण का दायरा बढ़ता जा रहा है।
इस मुद्दे पर धार्मिक संगठनों ने भी नाराजगी जताई है। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम का कहना है कि हरिद्वार सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है तो संगठन स्वयं आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेगा।
वहीं प्राचीन अवधूत आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज ने भी हरिद्वार क्षेत्र से कथित अवैध निर्माण हटाने की मांग का समर्थन किया है।
अब देखना यह होगा कि न्यायालय में लंबित मामले के बीच वन विभाग और राज्य प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाते हैं।
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