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बड़ी खबर :उत्तराखंड में नए शिक्षा नियमों से मदरसों पर संकट? मान्यता अनिवार्य होने से सैकड़ों संस्थान खतरे में

@शब्द दूत ब्यूरो (01 मई 2026)

देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार द्वारा लागू किए गए नए शिक्षा पंजीकरण नियमों के बाद राज्य की मदरसा शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन और सभी संस्थानों के लिए उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता अनिवार्य किए जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि बड़ी संख्या में मदरसे बंद हो सकते हैं।

सरकार के फैसले के अनुसार अब राज्य के सभी मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से संबद्धता और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। बिना मान्यता के संस्थानों को अवैध मानते हुए उन पर कार्रवाई की जाएगी।

राज्य में वर्तमान में 452 पंजीकृत मदरसों की मान्यता 30 जून को समाप्त हो रही है। वहीं करीब 950 मदरसों की पहचान सर्वे में हुई थी, जिनमें से लगभग 300 पहले ही बिना अनुमति संचालित पाए गए और बंद किए जा चुके हैं।

नए नियमों के तहत मान्यता के लिए स्कूलों को जमीन, भवन, शिक्षक, सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े कड़े मानकों को पूरा करना होगा।

  • शहरी क्षेत्रों में कम से कम 2000 वर्ग मीटर भूमि और खेल मैदान अनिवार्य
  • कक्षाओं के लिए निर्धारित आकार के कमरे, लाइब्रेरी, टॉयलेट और पानी की व्यवस्था जरूरी
  • प्रशिक्षित (TET, D.El.Ed/B.Ed) शिक्षक अनिवार्य
  • फायर NOC और भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र जरूरी

सूत्रों के अनुसार, राज्य के अधिकांश मदरसे मस्जिदों या छोटे भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां न पर्याप्त जमीन है, न ही मानकों के अनुरूप ढांचा या प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध हैं।

पंजीकृत मदरसों में करीब 46 हजार बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। अब इन सभी संस्थानों को 1 जुलाई से पहले नई व्यवस्था के तहत मान्यता लेनी होगी, अन्यथा इनकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि राज्य में अवैध मदरसों को बंद किया जा चुका है और अब सभी बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली के तहत पढ़ाया जाएगा।

वहीं अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, सरकार का उद्देश्य सभी बच्चों को समान शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि संस्थान धार्मिक शिक्षा देना चाहते हैं, तो वह भी तय मानकों के तहत संभव होगा।

कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों के लिए मान्यता का अधिकार जिला विद्यालय समिति के पास होगा, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के लिए राज्य स्तर पर आवेदन करना होगा।

  • आवेदन शुल्क: 10,000 से 15,000 रुपये
  • सुरक्षा राशि: 2 से 3 लाख रुपये
  • मान्यता अवधि: 3 वर्ष

इसके अलावा NEP 2020, RTE 2009 और NCERT/SCERT पाठ्यक्रम को अनिवार्य किया गया है।

मदरसा संचालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन के कागज, भवन मानक, प्रशिक्षित शिक्षक और वित्तीय ऑडिट जैसे नियमों को पूरा करना है। कई संचालकों का कहना है कि इतने कम समय में इन शर्तों को पूरा करना बेहद कठिन है।

सरकार जहां इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं जमीनी हकीकत यह संकेत दे रही है कि नए नियमों के चलते राज्य में बड़ी संख्या में मदरसों का संचालन बंद हो सकता है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि कितने संस्थान इन मानकों पर खरे उतर पाते हैं।

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