@शब्द दूत ब्यूरो (16 अप्रैल 2026)
नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बड़ा बयान देते हुए कई भ्रमों को दूर करने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत के राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या कम नहीं की जाएगी।
अमित शाह ने जाति जनगणना को लेकर भी स्थिति साफ करते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस दिशा में निर्णय ले चुकी है और वर्तमान में चल रही जनगणना उसी आधार पर की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस विषय पर किसी तरह की भ्रांति न फैलाएं।
इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन को लेकर उठ रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। शाह ने कहा कि परिसीमन आयोग का कानून पहले जैसा ही है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान चुनावों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
गृह मंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, खासकर दक्षिणी राज्यों और जाति जनगणना को लेकर चल रही बहस के बीच यह बयान अहम माना जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों की लोकसभा सीटों में कोई कमी नहीं की जाएगी, अब इससे जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं जो इस दावे को मजबूत करते हैं।
जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 543 लोकसभा सीटों में दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों—कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल—की कुल 129 सीटें हैं, जो लगभग 23.76% हिस्सेदारी दर्शाती हैं।
यदि भविष्य में परिसीमन के तहत सीटों में लगभग 50% की वृद्धि कर कुल संख्या 816 की जाती है, तो इन राज्यों की सीटें बढ़कर 195 हो जाएंगी। इसके बावजूद उनकी हिस्सेदारी लगभग 23.87% ही रहेगी, यानी प्रतिशत के स्तर पर कोई कमी नहीं आएगी।
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कर्नाटक की 28 सीटें बढ़कर 42, आंध्र प्रदेश की 25 से 38, तेलंगाना की 17 से 26, तमिलनाडु की 39 से 59 और केरल की 20 से 30 सीटें होने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि सीटों की कुल संख्या बढ़ने के बावजूद दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी लगभग समान बनी रहेगी। ऐसे में सीटों में कटौती की आशंकाएं निराधार प्रतीत होती हैं।
यह मुद्दा पिछले कुछ समय से राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ था, खासकर दक्षिण भारत में, जहां परिसीमन को लेकर चिंताएं जताई जा रही थीं। अब गृह मंत्री के बयान और सामने आए आंकड़ों के बाद स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।
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