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थाने में हैवानियत का अंत! पिता-पुत्र को टॉर्चर कर मारने वाले 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड, कोर्ट की टिप्पणी, दुर्लभ से दुर्लभतम अपराध, कोविड के दौरान हुई थी घटना

यह वही मामला है जिसने जून 2020 में पूरे देश को हिला दिया था। लॉकडाउन नियमों के कथित उल्लंघन के आरोप में 19 जून 2020 को पुलिस ने 58 वर्षीय जेयराज और उनके 31 वर्षीय बेटे बेनिक्स को हिरासत में लिया था।

@शब्द दूत ब्यूरो (06 अप्रैल 2026)

मदुरै/नई दिल्ली। देश को झकझोर देने वाले तमिलनाडु के सातानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में सोमवार को ऐसा फैसला आया, जिसने पुलिसिया बर्बरता पर देशभर में नई बहस छेड़ दी है। मदुरै की जिला अदालत ने पिता-पुत्र पी. जेयराज और जे. बेनिक्स को थाने में कथित तौर पर बेरहमी से प्रताड़ित कर मौत के घाट उतारने के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड सुनाया है। अदालत ने इस अपराध को “दुर्लभतम से भी दुर्लभ” श्रेणी का बताते हुए साफ कहा कि जब कानून के रखवाले ही कातिल बन जाएं, तो सामान्य सजा पर्याप्त नहीं हो सकती।

यह वही मामला है जिसने जून 2020 में पूरे देश को हिला दिया था। लॉकडाउन नियमों के कथित उल्लंघन के आरोप में 19 जून 2020 को पुलिस ने 58 वर्षीय जेयराज और उनके 31 वर्षीय बेटे बेनिक्स को हिरासत में लिया था। आरोप है कि दोनों को थाने में अमानवीय यातनाएं दी गईं, जिसके बाद कुछ ही दिनों में कोविलपट्टी सरकारी अस्पताल में उनकी मौत हो गई। यह मामला बाद में पूरे देश में कस्टोडियल टॉर्चर और पुलिस जवाबदेही का प्रतीक बन गया।

फैसला सुनाते हुए अदालत ने बेहद तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने माना कि पिता-पुत्र को हिरासत में बुरी तरह पीटा गया, और इस हमले में शामिल पुलिसकर्मियों ने बाद में सबूत छिपाने की भी कोशिश की। अदालत के अनुसार, यह कोई साधारण अपराध नहीं बल्कि राजकीय वर्दी में किया गया क्रूर अपराध था। आरोपियों पर हत्या, गंभीर चोट पहुंचाने, फर्जी केस दर्ज करने और साक्ष्य गढ़ने जैसे गंभीर आरोप सिद्ध हुए।
मामले की जांच सीबीआई ने की थी। जांच एजेंसी ने फॉरेंसिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम डिटेल और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत में साबित किया कि दोनों के साथ थाने में क्रूर मारपीट हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, थाने में मिले खून के निशान और शरीर पर दर्ज चोटें इस केस के सबसे अहम सबूत बने।

फैसले के बाद पीड़ित पक्ष के वकील ने इसे ऐतिहासिक न्याय बताया। अदालत ने सिर्फ फांसी की सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि पीड़ित परिवार को बड़ा मुआवजा देने का भी आदेश दिया। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने निर्देश दिया कि मृतक बेनिक्स की मां को कुल 1.40 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए। यदि दोषी मुआवजा नहीं देते, तो उनकी संपत्ति जब्त कर रकम वसूली जाएगी।

फैसले के बाद परिवार की ओर से कहा गया कि उन्होंने लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार न्याय देखा है। परिवार ने उम्मीद जताई कि अब किसी और घर का बेटा और पिता थाने में इस तरह नहीं मारा जाएगा। यह फैसला सिर्फ एक परिवार की जीत नहीं, बल्कि उन तमाम आवाज़ों की जीत माना जा रहा है जो कस्टोडियल हिंसा के खिलाफ वर्षों से लड़ रही थीं।
सातानकुलम केस पर आया यह फैसला अब सिर्फ एक अदालत का निर्णय नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए कड़ा संदेश बन गया है—
“वर्दी कानून से ऊपर नहीं है।”
यह निर्णय आने वाले समय में पुलिस सुधार, मानवाधिकार और हिरासत में सुरक्षा पर राष्ट्रीय बहस को और तेज़ कर सकता है।

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