इस मामले में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ़ ऑर्गनाइज़्ड क्राइम्स एक्ट (मकोका) की विशेष अदालत ने सितंबर 2015 में 12 लोगों को दोषी करार दिया था। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक़ विशेष अदालत ने पांच दोषियों को मृत्युदंड और सात दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी।
@शब्द दूत ब्यूरो (21 जुलाई 2025)
मुंबई । 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन बम विस्फोट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में दोषी ठहराए गए सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष इन आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने में असफल रहा।
गौरतलब है कि 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में सात सिलसिलेवार धमाके हुए थे, जिनमें 189 लोगों की जान चली गई थी और करीब 827 लोग घायल हो गए थे। यह घटना देश के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक मानी जाती है।
इस मामले में 2015 में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट की विशेष अदालत ने 5 आरोपियों को फांसी की सजा और 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। लेकिन अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभियोजन के साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया है।
यह फैसला न केवल कानूनी प्रणाली की कसौटी पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पीड़ित परिवारों के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब देखना होगा कि क्या सरकार इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देती है या नहीं।
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