@शब्द दूत ब्यूरो (15 जुलाई 2025)
नई दिल्ली। देश में बेरोजगारी की समस्या पर फिलहाल कोई ब्रेक लगता नजर नहीं आ रहा है। जून 2025 में भारत की बेरोजगारी दर 5.6% दर्ज की गई, जो मई के समान स्तर पर बनी रही। यह आंकड़ा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के ताजा सर्वेक्षण से प्राप्त हुआ है। लगातार दूसरे महीने बेरोजगारी दर में कोई गिरावट न होना एक चिंताजनक संकेत माना जा रहा है, खासकर तब जब सरकार विभिन्न रोजगार योजनाओं को गति देने के प्रयास में जुटी है।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में यह दर 5.1% थी, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही थी कि मई और जून में इसमें गिरावट आ सकती है। लेकिन इसके विपरीत, बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी देखने को मिली और वह अब स्थिर बनी हुई है।
यह रिपोर्ट साप्ताहिक स्थिति पर आधारित डेटा का विश्लेषण है, जिसमें रोजगार योग्य व्यक्तियों की कार्य स्थिति को ध्यान में रखा गया है। PLFS के अनुसार, यह सर्वेक्षण रोजगार के मौजूदा परिदृश्य पर नजर रखने और नीति निर्माण में मदद के लिए किया जाता है।
विशेष बात यह है कि सरकार ने इस वर्ष से मासिक बेरोजगारी रिपोर्ट जारी करने की शुरुआत की है, जिससे रोजगार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों पर नजदीकी नजर रखी जा सके। पहले यह रिपोर्ट तिमाही या वार्षिक आधार पर आती थी, जिससे छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव का विश्लेषण करना कठिन होता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी दर में यह स्थिरता ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार सृजन की धीमी गति को दर्शाती है। कई क्षेत्रों, खासकर निर्माण, सेवा और कृषि आधारित क्षेत्रों में अपेक्षित रोजगार नहीं मिल पा रहे हैं।
हालांकि, सरकार का दावा है कि नए औद्योगिक निवेश और स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने के प्रयासों से आने वाले महीनों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। लेकिन फिलहाल के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि देश को बेरोजगारी की चुनौती से निपटने के लिए और अधिक ठोस और समयबद्ध रणनीति की आवश्यकता है।
सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए यह एक संकेत है कि केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी से ही परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
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