@शब्द दूत ब्यूरो (08 जुलाई 2025)
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग देशभर के उन राजनीतिक दलों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है, जो 2019 के बाद से किसी भी प्रकार का चुनाव नहीं लड़े हैं। आयोग की प्रारंभिक सूची के अनुसार, ऐसे 345 राजनीतिक दल हैं, जिनका न कोई पार्टी कार्यालय मौजूद है, न ही किसी भी स्तर—लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय—पर इन्होंने कोई सक्रियता दिखाई है।
इन दलों की निष्क्रियता को देखते हुए आयोग अब इनकी पंजीकृत मान्यता रद्द करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। आयोग का कहना है कि निष्क्रिय राजनीतिक दल न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं, बल्कि इनका अस्तित्व फर्जीवाड़े, हवाला लेनदेन और चंदा चोरी जैसे मामलों में भी शक के घेरे में आता है।
इन 345 दलों में बिहार के 17 राजनीतिक दल शामिल हैं, जिनमें कुछ के नाम तो आम जनता ने शायद ही कभी सुने हों। आयोग के रडार पर आए बिहार के ये दल भारतीय बैकवर्ड पार्टी, भारतीय सुराज दल, भारतीय युवा पार्टी (डेमोक्रेटिक), भारतीय जनतंत्र सनातन दल, बिहार जनता पार्टी, देशी किसान पार्टी, गांधी प्रकाश पार्टी, हमदर्दी जनरक्षक समाजवादी विकास पार्टी (जनसेवक), क्रांतिकारी साम्यवादी पार्टी, क्रांतिकारी विकास दल, लोक आवाज दल,लोकतांत्रिक समता दल, नेशनल जनता पार्टी (इंडियन), राष्ट्रवादी जन कांग्रेस, राष्ट्रीय सर्वोदय पार्टी, सर्वजन कल्याण लोकतांत्रिक पार्टी, व्यवसायी किसान अल्पसंख्यक मोर्चा भी शामिल हैं।
निर्वाचन आयोग द्वारा की जा रही यह पहल चुनाव सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आयोग का मानना है कि केवल नाम के लिए अस्तित्व में बने राजनीतिक दल न केवल संसाधनों की बर्बादी करते हैं, बल्कि कई बार ये राजनीतिक फंडिंग और कर चोरी के माध्यम भी बन जाते हैं।
भारत निर्वाचन आयोग अब इन दलों से औपचारिक जवाब मांग सकता है। अगर तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता, तो इनकी पंजीकरण मान्यता रद्द कर दी जाएगी। इससे चुनावी व्यवस्था और राजनीतिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और सक्रियता को बढ़ावा मिलेगा।
यह कार्रवाई उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत आयोग देश की राजनीतिक व्यवस्था को साफ-सुथरा और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
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