Breaking News

तो क्या चुनावी नुकसान के डर से भाजपा के संकल्प पत्र से एन आर सी का मुद्दा गायब हो गया, देखिए वीडियो एक विश्लेषण

@शब्द दूत ब्यूरो (16 अप्रैल 2024)

नयी दिल्ली। चुनावी संकल्प पत्र से एन आर सी को बाहर कर दिया भाजपा ने जबकि वादा था बाहर से आये बगैर वैध दस्तावेज के भारत में रह रहे नागरिकों को बाहर करने का।

गृह मंत्री अमित शाह अमित शाह  ये कहते नहीं थकते थे कि “दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है, जहाँ कोई भी जाकर बस सकता है। देश के नागरिकों का रजिस्टर होना, यह समय की ज़रूरत है। हमने अपने चुनावी घोषणा पत्र मे देश की जनता को वादा किया है। न केवल असम, बल्कि देश भर के अंदर हम एनआरसी लेकर आएँगे। एनआरसी के अलावा देश में जो भी लोग हैं, उन्हें क़ानूनी प्रक्रिया के तहत बाहर किया जाएगा।

लेकिन आश्चर्यजनक रूप से भाजपा के लोकसभा चुनाव 2024 के संकल्प पत्र से नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स का मुद्दा गायब है।  बीजेपी ने सीएए को तो इस बार संकल्प पत्र में जगह दी है जबकि एनआरसी का जिक्र नहीं है जबकि पिछले चुनाव में बीजेपी का यह प्रमुख चुनावी वादा था। 2019 के चुनाव बीजेपी ने प्रमुखता से सीएए-एनआरसी को चुनावी मुद्दा भी बनाया था।

आपको याद होगा कि 2019 में सरकार बनने के बाद 2 दिसंबर को गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड में एक बयान में कहा था कि मैं आपको भरोसा देता हूं कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा और सभी घुसपैठियों की पहचान करके उनको 2024 के चुनाव से पहले देश से बाहर भेज दिया जाएगा। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अमित शाह का नवंबर 2023 में बयान आया कि अभी एनआरसी पर चर्चा नहीं।अभी एनआरसी नहीं आ रहा है।  बीजेपी के रुख में आए बदलाव के पीछे राजनीतिक और चुनावी वजह है। इसी का नतीजा है कि इस बार के संकल्प पत्र में एन आर सी लागू करने का कहीं जिक्र नहीं हैं। बीजेपी ने 2019 के संकल्प पत्र में बिना दस्तावेज के देश में अवैध तरीके से रह रहे लोगों से निपटने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत एन आर सी को लागू करने की घोषणा की थी। 2019 के बीजेपी ने घोषणा पत्र में कहा गया था कि अवैध तरीके से देश मे बस जाने की वजह से कुछ क्षेत्रों की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान में भारी बदलाव आया है, जिसके कारण स्थानीय लोगों की आजीविका और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

दरअसल एनआरसी को सीएए से जोड़कर देखा जा रहा है जिसका बीजेपी को लोकसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है। आम तौर पर माना जाता है कि सीएए नागरिकता देने वाला कानून है जबकि एनआरसी से नागरिकता छीन जाएगी। ऐसे में बीजेपी के विरोधी दल भी ऐसे दावे कर रहे है कि सीएए और एनआरसी एक है और नागरिकता छीनने के लिए ये कानून लाया जा रहा है.

उधर सीएए-एनआरसी को लेकर टीएमसी भी बीजेपी पर हमलावर है। टीएमसी के नेता प्रचारित कर रहे हैं कि सीएए के बाद केंद्र सरकार एनआरसी लाएगी जिससे हिंदुओं और मुस्लिमों की नागरिकता छीन ली जाएगी। ऐसे में बीजेपी को डर था कि एनआरसी को विरोधियों के ऐसे अभियान से मुस्लिम वोटरों का एकमुश्त ध्रुवीकरण टीएमसी के पक्ष में हो जाएगा जिसका फायदा टीएमसी या विरोधियों को होगा। क्योंकि अगर मुस्लिम वोटर बंटे तो ही बीजेपी के उम्मीदवारों की जीत की संभावना बन सकती है।

इसके साथ ही बीजेपी को डर ये भी था कि एनआरसी के नाम में देशभर में बीजेपी के विरोधी दलों को बीजेपी के खिलाफ धरना करने के लिए देशभर में समर्थन मिल सकता था जो कि चुनाव के लिहाज से भाजपा के लिए सही नहीं है। साथ ही बीजेपी को बंगाल और असम के हिंदू वोटरों की नाराजगी का भी डर था। क्योंकि विरोधियों ने एक धारणा बना दी थी कि एनआरसी में बहुत सारे हिंदुओं की भी नागरिकता चली जाएगी। हिंदू जो उन देशों से भारत में भागकर आए और देश में बसे थे उनमे से ज्यादातर अपनी नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज साथ नहीं ला पाए थे।

इसके पीछे बीजेपी के विरोधी असम का उदाहरण दे रहे थे जहां लाखों हिंदुओं को एनआरसी से बाहर कर दिया गया था। गौरतलब है कि असम में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की गई कवायद में राज्य के 3.29 करोड़ आवेदकों में से लगभग 19 लाख से अधिक आवेदकों को अंतिम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से बाहर कर दिया गया था। यही वजह है कि विरोधियों की रणनीति को कुंद करने और सीएए-एनआरसी को लेकर भ्रम ना पैदा हो बीजेपी ने एनआरसी को इस बार संकल्प पत्र से बाहर रखा।

Website Design By Mytesta +91 8809666000

Check Also

श्रीराम संस्थान काशीपुर में महिला दिवस पर स्वास्थ्य व महिला सशक्तिकरण पर हुआ जागरूकता संवाद, घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव, शिक्षा में असमानता, दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी चुनौतियां अब भी

🔊 Listen to this @शब्द दूत ब्यूरो(09 मार्च 2026) काशीपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर …

googlesyndication.com/ I).push({ google_ad_client: "pub-