@शब्द दूत ब्यूरो (28 अक्टूबर, 2022)
बात तो मांस-मदिरा पर प्रतिबंध लगाने की हो रही थी, लेकिन जब शराब की बिक्री के आंकड़े सामने आए तो सब चौंक गए। बाबा विश्वनाथ के शहर बनारस में इन दिनों शराब और मांस की बिक्री पर रोक लगाने की आवाज उठने लगी है। धर्म नगरी काशी में इस आवाज के बीच चौकानें वाले आंकड़े सामने आए हैं।
बीते छह महीने में काशी के बनारसी 1300 सौ करोड़ की शराब गटक गए हैं। ये आंकड़ा है आबकारी विभाग का है जो शराब, भांग जैसी चीजों की बिक्री की मॉनिटरिंग का काम करता है। विभाग के आंकड़े के मुताबिक वाराणसी में पर्यटन कारोबार के बीच शराब की खपत भी बढ़ी है।
जिला आबकारी अधिकारी के अनुसार 2019 में कोरोना काल के दौरान इसमे कमी जरूर आई थी। लेकिन इस बार विभाग की ओर से दिए गए टारगेट का 50 फीसदी छह महीने में ही कवर हो गया। वाराणसी में पिछले छह महीने में शराब और बीयर की बिक्री से सरकार को करीब 700 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है।
विभाग की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, वाराणसी में छः महीने में बनारसी करीब 1300 करोड़ की शराब और बीयर पी गए हैं. ये आंकड़ा पिछले साल की अपेक्षा करीब डेढ़ गुना तक बढ़ा है। मार्च से सितंबर के बीच वाराणसी में करीब पांच लाख बोतल शराब की बिक्री हुई। वहीं बीयर की करीब 17 लाख बोतल और केन की खपत हुई। ऐसा तब हो रहा है जब शराब और मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए वाराणसी में संतों के साथ समाजसेवी संस्थाएं लगातार आवाज उठा रही है और लोगों को इसका सेवन नहीं करने के लिए लगातार जागरूक भी कर रही हैं.
आगमन सामाजिक संस्था के सचिव ने कहा कि काशी सप्तपुरियों में सबसे श्रेष्ठ है। इसलिए यहां भी अयोध्या और मथुरा के तर्ज पर शराब और मांस की बिक्री प्रतिबंधित हो इसके लिए हम लोग लगातार आंदोलन कर रहे हैं। साथ ही शराब बंदी को लेकर हम लोगों ने प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखकर ये मांग उठाई है।
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