@शब्द दूत ब्यूरो (16 मई 2022)
काशीपुर । शहर के निजी अस्पताल के संचालकों पर लगे दुष्कर्म के आरोपों की सच्चाई सामने आनी चाहिए। पिछले तीन दिनों से संजीवनी अस्पताल के संचालक मुकेश चावला, मनीष चावला और राज गुम्बर पर वहां कार्यरत एक महिला द्वारा दुष्कर्म के आरोपों की तहरीर पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के संज्ञान में है। हालांकि अभी इस मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। महिला ने भी कुछ मीडिया संस्थानों को दुष्कर्म के आरोपियों के बाकायदा नाम लेते हुए अपनी बात रखी है।
पर इधर एकाएक कथित पीड़ित महिला ने जिस जोर शोर से मामले को उछाला उससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई है। पुलिस अधिकारी इस मामले के संज्ञान में होने के बाद जिस तरह से हल्के में ले रहे हैं वह अपने आप में आश्चर्यजनक है। मामले की सच्चाई आखिर क्या है? अस्पताल संचालकों ने क्या कोई दबाव बनाकर इस बहुचर्चित प्रकरण की रिपोर्ट दर्ज होने से पहले ही फुस्स कर दिया है?
जिस तरह से यह कथित दुष्कर्म का मामला शहर की फिजा गरमा गया उतनी ही शांति से इसे ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कामयाब होती नजर आ रही है। समाचार पत्रों में छपी व अन्य मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि कुछ न कुछ मामला था। पर पुलिस व प्रशासन का इस मामले में ढुलमुल रवैया कुछ सवाल जरूर खड़े कर रहा है। कौन है जो इस चर्चित मामले में कार्रवाई से रोक रहा है?
तहरीर आई। तहरीर पुलिस से लेकर मीडिया कर्मियों के पास तक है। पीड़ित महिला अपनी बाइट देती है। एसपी स्वयं इस मामले से अवगत हैं। आखिर सच्चाई क्या है? आरोप सच हैं या झूठ? झूठ हैं तो पीड़िता बताये और अगर सच है तो पुलिस की कार्रवाई हो।
सबसे बड़ी बात यह है कि आरोपी साबित करना मीडिया का काम नहीं है और आरोपों को गलत बताना भी मीडिया का काम नहीं। पुलिस व प्रशासन की कार्रवाई और जांच के बाद ही यह तय होगा कि कौन दोषी है कौन नहीं?
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