@शब्द दूत ब्यूरो (10 मई, 2022)
आदिगुरु शंकराचार्य ने बद्रीनाथ की प्राण प्रतिष्ठा के बाद कपाट खोलने से लेकर पूजन की जो व्यवस्था बनाई थी, उसका आज तक अक्षरश: पालन हो रहा है।
बदरीनाथ धाम के मुख्य रावल नंबूदरी हैं। वे केरल के नंबूदरी ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं और आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। उनके अलावा कोई भी भगवान की मूर्ति को स्पर्श नहीं कर सकता है।
बदरीनाथ धाम को काशी की तर्ज पर मास्टर प्लान के दायरे में लाया जा रहा है। इसके लिए पहले फेज में 29 दुकानों और होटलों को तोड़ दिया गया। बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण के लिए पहले फेज की लागत 230 करोड़ है। इसमें बीआरओ की एक किलोमीटर बाईपास सड़क के साथ पांच अन्य काम किए जाने हैं। ये काम तीन चरण में होना है।
बदरीनाथ में एक दिन में पहले 12 हजार तक यात्री ठहर सकते थे। कई होटल टूटने से ये क्षमता घटकर सात हजार तक ही बची है। ऐसे में आने वाले दिनों में अफरातफरी मच सकती है। होटल और दुकानें तोड़े जाने से कारोबारियों में रोष है।
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