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 काशीपुर फ्लैश बैक :सत्येंद्र चंद्र गुड़िया के आदर्श आज भी प्रासंगिक, डॉ० दीपिका गुड़िया आत्रेय

@शब्द दूत ब्यूरो (22 अप्रैल 2022)

काशीपुर । इंसान अच्छा हो तो उसके आदर्शों और सिद्धांतों में पला उसका परिवार भी समाज में उसके संस्कारों को आगे बढ़ाता हैं । पूर्व सांसद स्व० सत्येंद्र चंद्र गुड़िया के साथ यही हो रहा है। इनकी बेटियों ने इस मिथक को तोड़ा है कि इंसान के खानदान को उसके बेटे ही रोशन करते हैं । ऐसा नही हैं ।भले ही श्री गुड़िया के कोई बेटा नहीं था मगर बेटियों ने भी उनके आदर्शों को आगे बढ़ाकर दिखा दिया कि बेटियां भी बेटों से कम नहीं होती। श्री गुड़िया की सबसे छोटी पुत्री डॉक्टर दीपिका गुड़िया आत्रेय ने अपनी बड़ी बहन श्रीमती मीनाक्षी प्रवीण शर्मा तथा मंझली बहन श्रीमती प्रियंका शर्मा के साथ मिलकर न सिर्फ अपनी माता श्रीमती विमला गुड़िया की हिम्मत बढ़ाकर उनका सहारा बनी बल्कि अपने पिता के आदर्शों को भी आगे बढाने में कोई कमी नहीं छोडी।

स्वर्गीय सत्येंद्र चंद्र गुड़िया के बारे में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती विमला गुड़िया कहती हैं कि श्री गुड़िया अत्यंत भावुक व दयालु प्रवृत्ति के थे ।उनमें क्रोध तो था मगर उनका क्रोध क्षणिक होता था। उन्हें गलत बात पसंद नहीं थी और यही कारण है कि गलत बात पर उन्हें तुरंत क्रोध आ जाता था, मगर कई बार शांत होने पर वे अपने क्रोध के प्रति मनन भी करते थे और जिस पर क्रोध आता था उसके सामने भी अपने क्रोध को स्वीकार कर उस व्यक्ति को सामान्य कर देते थे ।नारी जाति के प्रति उनके अंदर अपार सम्मान था ।जहां तक मेरा सवाल है तो मेरी बात को उन्होंने हमेशा सम्मान दिया। वे काशीपुर क्षेत्र के विकास के प्रति हमेशा तत्पर रहते थे और सभी धर्मों के साथ-साथ दूसरे राजनीतिक दलों का भी सम्मान करते थे । यही कारण है कि वह अपने विरोधियों के भी काम करा दिया करते थे। आज वे हमारे साथ नहीं है, मगर आज भी उनके आदर्श और संस्कार उन्हें जिंदा रखे हुए हैं । कई बार हमें महसूस देता है कि हम जो कर रहे हैं उसमें श्री गुड़िया का हमें मार्गदर्शन मिल रहा है। उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने हेतु मैं निरंतर समाज सेवा से जुड़ी हूं। मेरा मानना है कि उनके विचारों और सिद्धांतों को आगे बढ़ाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

श्री गुड़िया की सबसे छोटी पुत्री डॉक्टर दीपिका गुड़िया आत्रेय ने पिता के अधूरे सपनों और उनकी दूरदर्शी सोच को नई गति देने में वास्तव में भागीरथ प्रयास किए हैं। वह कहती है कि 24 अप्रैल का दिन वह दिन है जब श्री गुड़िया जी हमें छोड़ कर आत्मा के अनंत रूप में विलीन हो गए थे। बावजूद इसके हम उनकी पुण्यतिथि को शोक दिवस के रूप में नहीं बल्कि हर वर्ष विकास के नए संकल्पों के अवसर के रूप में मनाते हैं ,और श्री गुड़िया भी भले ही अब हमारे बीच नहीं है मगर उनके आदर्श और सिद्धांत आज भी हमें नई ऊर्जा और ताकत देते हैं ।कुछ नया करते समय हमें स्पष्ट महसूस देता है कि जैसे श्री गुड़िया जी की आत्मा हमें निर्देशन दे रही हो। हम प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि उस पुण्य आत्मा का आशीर्वाद हमें इसी तरह नई ताकत व नई सोच देता रहे और हमारा मार्गदर्शन करता रहे।

श्री गुड़िया की सबसे बड़ी पुत्री मीनाक्षी प्रवीण शर्मा कहती हैं कि मेरे पापा एक बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी थे ।उनका वर्णन करने के लिए मेरा शब्दकोष छोटा प्रतीत हो रहा है ।मन में उदगार बहुत हैं मगर जैसे उन्हें व्यक्त करने के लिए उपयुक्त शब्द नहीं मिल रहे । एक तरह से मेरी भावनाओं का एक महान व्यक्तित्व के धनी सहृदय पिता को शब्दों में कैद कर पाना असंभव सा लग रहा है। प्रभु उन्हें अपने चरणों में स्थान दे ,और वह दिव्य आत्मा हमेशा हमारा मार्गदर्शन करती रहे। मेरी प्रभु से यही प्रार्थना है।

श्री गुड़िया की मंझली पुत्री श्रीमती प्रियंका शर्मा कहती है कि सद्गुणों से परिपूर्ण और बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी मेरे पापा आज भले ही हमारे साथ नहीं हैं मगर निराकार रूप में उनका आशीर्वाद सदैव हमारे ऊपर बना रहता है। उनकी मृत्यु एक स्वर्णिम युग का अंत ही नहीं वरन एक नए युग का प्रारंभ है । उनके नैतिक मूल्य और उनके आदर्श तथा विचार ही नहीं वरन उनका संपूर्ण व्यक्तित्व एक ऐसी अमूल्य धाती है जो भावी पीढ़ी के लिए एक नवयुग का निर्माण करने में सहायक हो रही है और होती रहेगी।

श्री गुड़िया के मंझले दामाद अशोक शर्मा कहते हैं कि पिता समान मेरे ससुर श्री सत्येंद्र चंद गुड़िया न सिर्फ एक अच्छे व्यक्तित्व के स्वामी थे बल्कि अपने दामादो को पुत्र समान स्नेह और आशीर्वाद के साथ-साथ बेहतर मार्गदर्शन भी करते थे। जीवन की विषम परिस्थितियों से लड़ने का मूल मंत्र उन्होंने ही दिया। उन्होंने ही हमे समाज के प्रति रचनात्मक व सकारात्मक सोच बनाए रखने का संदेश दिया ।आज भी भले ही वें नहीं है मगर उनके द्वारा दिए गए संस्कार आज भी हमारा इस तरह से मार्गदर्शन कर रहे हैं जैसे श्री गुड़िया न होते हुए भी आज भी हमारे साथ हों। उस महान आत्मा को मैं शत-शत नमन करता हूं।

श्री गुड़िया के सबसे छोटे दामाद वैज्ञानिक डॉक्टर नीरज आत्रेय कहते हैं कि उनके ससुर स्वर्गीय सत्येंद्र चंद्र गुड़िया एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे कि उनके उस व्यक्तित्व के बारे में कुछ भी कहना सूरज को रोशनी दिखाने जैसा है ।उनके आदर्श और संस्कार आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं। काश ईश्वर उन्हें और अधिक आयु देता ताकि हम उनसे और अधिक सीख पाते ।अब तो जीवन का बस यही उद्देश्य है कि उनके लक्ष्य को हम सब मिलकर पूरा करें और उनके अधूरे कार्यों को संपूर्ण करें ,यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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