@शब्द दूत ब्यूरो (27 मार्च 2022)
दिव्यांग बच्चों के भविष्य को संवारने में लगी यूएसआर इंदु समिति इन दिनों भयंकर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। पिछले 21 वर्ष से पीरूमदारा बसई में समिति द्वारा शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम बच्चों की शिक्षा व उत्थान के लिए स्कूल का संचालन किया जा रहा है। यूएसआर इंदु समिति के संदीप रावत ने ऐसे दिव्यांग बच्चों जो कि मूक बधिर हैं या किसी शारीरिक अक्षमता के चलते समाज में वह स्थान नहीं हासिल कर सकते जो अन्य बच्चों को मिलता है। उनके लिए इस समिति के माध्यम से शिक्षा और उनके रोजगार की दिशा में प्रयास रत है।
यूएसआर इंदु समिति को जनसहयोग से संचालित किया जाता रहा है। सरकार की ओर से समिति को कोई सहायता नहीं मिलती। लेकिन अब समिति गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है। यहाँ तक कि इस समिति में शिक्षा पा रहे 96 बच्चों के भरण-पोषण तथा स्टाफ के वेतन के लिए महज एक माह की व्यवस्था शेष है। समिति ने आम लोगों व समाज सेवियों से इस गंभीर आर्थिक संकट से निजात दिलाने की अपील की है। 
उत्तराखंड की एसिड अटैक सर्वाइवर कु कविता बिष्ट भी समिति के अंतर्गत कविताज वूमन सपोर्ट होम के जरिए ग्रामीण निराश्रित महिलाओं के लिए रोजगारपरक कोर्स चलाकर उन्हें स्वावलंबी बनाने में जुटी हुई है। लेकिन उत्तराखंड की इस हिम्मती महिला को भी अब लगने लगा है कि वह गंभीर आर्थिक संकट के चलते अपने इस मिशन को आगे किस तरह जारी रख पायेगी। कविता बिष्ट ने भी जनसामान्य से अपील की है कि समाज इस क्षेत्र में अपनी भागीदारी कर इस कार्य में आर्थिक सहयोग दे ताकि यह मिशन जारी रह सके।
समिति की ओर से एक कैंपेन चलाया जा रहा है जिसमें कहा गया है कि ये मौका है समाजहित में कुछ करने का, दिव्यांग बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का। यूएसआर इंदु समिति आर्थिक अस्थिरता से गुजर रही है। आपके सहयोग की आवश्यकता है।
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शब्द दूत न्यूज पोर्टल के पाठकों से भी अनुरोध है कि इस मिशन को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए आर्थिक मदद अवश्य करें।
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