@शब्द दूत ब्यूरो (24 जनवरी 2022)
काशीपुर । काशीपुर विधानसभा सीट पर अब यहाँ सभी दलों के प्रत्याशी घोषित होने के बाद चुनावी शतरंज की बिसात बिछ चुकी है। शह और मात का खेल शुरु हो गया है। राष्ट्रीय दलों में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद चुनावी रण अब दिलचस्प मोड़ ले चुका है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के तमाम दावेदारों को दरकिनार कर दिया गया है। भाजपा के प्रत्याशी की घोषणा के साथ ही यहाँ जो कुछ घटनाक्रम घटा उससे भाजपा प्रत्याशी अन्य दलों के मुकाबले पीछे नजर आ रहा है वहीं कांग्रेस में इसके विपरीत खुलकर कोई खास विरोध नहीं दिखाई दे रहा है। लेकिन देखना होगा कि मन मसोसकर पार्टी के फैसले का समर्थन करन मजबूरी है या फिर भीतर ही भीतर अधिकृत प्रत्याशी को लेकर कोई खेल चल रहा है। हालांकि प्रकट में अगर देखा जाए तो इस समय भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी त्रिलोक सिंह चीमा के सामने सबसे ज्यादा मुश्किलें हैं।
कांग्रेस से पूर्व सासंद के सी सिंह बाबा के पुत्र नरेंद्र चंद्र सिंह के नाम की घोषणा होने के बाद कांग्रेस नेताओं का एकजुट होना भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन गया है। भाजपा प्रत्याशी का खुला विरोध और कांग्रेस प्रत्याशी का पार्टी नेताओं का समर्थन ये इस बार के चुनाव की खास बात है। पर क्या कांग्रेस पिछले चुनावों की तरह भीतरघात के दंश को झेल पायेगी?
उधर आम आदमी पार्टी की ओर से लंबी पारी खेल रहे दीपक बाली इस समय मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। उनके सामने सभी संभावनायें खुली है। एंटी इन्कंबैसी का उन्हें कोई खतरा नहीं। अपनी पार्टी के चुनावी वादों और गारंटी की तमाम घोषणाओ के साथ वह जनता के बीच जा रहे हैं। जबकि भाजपा प्रत्याशी त्रिलोक सिंह चीमा के साथ एंटी इन्कंबैसी के साथ साथ अपनी ही पार्टी के नेताओं का विरोध झेलकर जनता के बीच जाना है। उधर कांग्रेस के प्रत्याशी नरेंद्र चंद्र सिंह एक नये राजनेता के रूप में जनता के बीच है। हालांकि उनके पिता पूर्व सांसद के सी सिंह बाबा के राजनीतिक अनुभव की विरासत का उन्हें सहारा है।
उत्तराखण्ड क्रांति दल से घोषित प्रत्याशी मनोज डोबरियाल अपेक्षाकृत राजनीति में बिना किसी सहारे के इस राज्य की क्षेत्रीय पार्टी का चेहरा बनकर जनता के बीच हैं। वैसे काशीपुर विधानसभा में पर्वतीय मतदाताओं की अच्छी खासी तादाद है। पिछले कुछ समय से काशीपुर में पर्वतीय समुदाय अपने में से ही किसी प्रत्याशी को खड़ा करने के लिए मुखर हो रहा था। खासतौर से भाजपा कांग्रेस से पर्वतीय मूल के व्यक्ति को टिकट देने की भी मांग कर रहा था। मनोज डोबरियाल क्या पर्वतीय मतदाताओं का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कर पायेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा हालांकि कांग्रेस प्रथ्याशी नरेंद्र चंद्र सिंह मूलतः पर्वतीय समुदाय से आते हैं। पर के सी सिंह बाबा और उनके पुत्र नरेंद्र चंद्र सिंह में फर्क है।
बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी गगन कांबोज कोरोना काल में शहर के चर्चित चेहरों में से उभरे थे। कोरोना के दौरान उन्होंने तमाम लोगों की मुश्किल वक्त में मदद कर खुद को एक समाजसेवी के रूप में स्थापित किया था। हालांकि इस दौरान उनका निशाना खासतौर पर शहर की बदहाल स्वास्थ्य सुविधायें थी। अपने क्रांतिकारी फेसबुक सोशल मीडिया लाइव से वह काशीपुर में काफी सुर्खियों में रहे। अचानक बहुजन समाज पार्टी से प्रत्याशी के रूप में सामने आकर उन्होंने विधानसभा चुनाव में कूदकर अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करा दी है।
इस चुनावी समर में अभी कौन आगे और कौन पीछे यह अभी तय कर पाना जल्दबाजी होगी। लेकिन विरोध सबसे ज्यादा भाजपा उम्मीदवार का है। हालांकि अभी शुरुआत है। सभी दम खम दिखाकर इस रण में डट गये हैं। भाजपा के बागी के रूप में भी अभी प्रत्याशी आना है। ऊषा चौधरी या राम मेहरोत्रा दोनों में से कौन सामने आता है?
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