@शब्द दूत ब्यूरो (23 जनवरी, 2022)
जागेश्वर सीट का भाजपा प्रत्याशी का टिकट जातीय समीकरण साधने की रणनीति में फंसा नजर आ रहा है। मोदी लहर के बावजूद पिछला चुनाव हारने वाले सुभाष पांडे के नाम पर सर्वानुमति न बनने से मामला और पेचीदा हो गया है। जागेश्वर सीट पर मुख्य रूप से सुभाष पांडेय, मोहन सिंह मेहरा, नंदन बिष्ट, गौरव पांडेय दावेदारी करने वालों में शामिल हैं। सुभाष पांडेय को पार्टी ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया था। लेकिन चुनाव हार गए थे। इस बार भी वह फिर से प्रबल दावेदार हैं, पर उनके नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई है। ऐसे में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह मेहरा ने भी यहां खम ठोका है।
कांग्रेस में उपेक्षा के कारण उन्होंने कुछ साल पहले भाजपा का दामन थामा था। भाजपा के साथ कम समय का सफर होने के चलते उनके नाम पर भी दल में एकराय नहीं है। दावेदारों की बात करें तो नरेंद्र बिष्ट और गौरव पांडेय का नाम भी शुमार है। सभी दावेदार अपने-अपने आकाओं के माध्यम से पैरोकारी में जुटे हुए हैं। दावेदारों के जातीय समीकरणों ने मामला और उलझा दिया है। ऐसे में पार्टी टिकट पर अंतिम निर्णय करने से पहले उसके बाद उत्पन्न होने वाली असंतोष जैसी परिस्थितियों का भी साथ-साथ आंकलन करना चाह रही है। इसी पर मंथन चल रहा है। खैर, फिलहाल सभी दावेदार भी दिल्ली में ही डेरा डाले हुए हैं।
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