@विनोद भगत
काशीपुर । मिलावट सिर्फ और सिर्फ त्यौहारों के समय पर करते हैं ये दुकानदार। बाकि साल भर इन दुकानों पर छापा मारने वाले विभागीय कर्मचारी और अधिकारियों के पास शायद काम नहीं होता होगा ऐसा माना जा सकता है।
दरअसल जब भी त्यौहार आते हैं तो ये विभाग और इसके कर्मचारी सक्रिय हो जाते हैं। जब दो देशों की सेनाओं के बीच युद्ध की आशंका होती है तो सैनिकों को तत्काल हमले का आदेश दिया जाता है और जो जिस हाल में होता है तुरंत युद्ध में लड़ने के लिए निकल पड़ता है। ठीक यही स्थिति इस विभाग की है। पूरे वर्ष भर इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी निष्क्रियता की स्थिति में रहते हैं। जीव विज्ञान में मेढकों की दो प्रकार की निष्क्रियता होती है। इस विभाग की पूरे समय निष्क्रियता जनता में चर्चा का विषय बनी रहती है। ठीक त्यौहार के आसपास ये अचानक प्रकट हो जाते हैं और ताबड़तोड़ छापामार की कार्रवाई कर अपने विभाग होने का प्रमाण देते हैं। त्यौहार के अगले दिन पुन: कुंभकर्णी नींद से में चले जाते हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि मिलावटखोर सिर्फ त्यौहार के समय ही मिलावट करते हैं।
वैसे इस मामले में मिलावटखोरों की ईमानदारी की सराहना करनी चाहिए और उनके और छापामार करने वाले विभाग के बीच के तालमेल भी अपने आप में मिसाल है।
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