@शब्द दूत ब्यूरो (20 सितंबर 2021)
काशीपुर । उत्तराखंड में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिहाज से गोल्डन कार्ड बनाने का काम लंबे समय से जारी है। लेकिन राज्य में कई स्थानों पर लोगों के गोल्डन कार्ड बनने में दिक्कतें आ रही है। यहाँ काशीपुर में उप कोषागार कार्यालय में भी गोल्डन कार्ड बनाये जा रहे हैं। इस समय गोल्डन कार्ड मात्र तीन स्थानों काशीपुर, हल्द्वानी व देहरादून में ही निजी एजेंसी के द्वारा बनाए जा रहे हैं। सरकार ने गोल्डन कार्ड बनाने का काम निजी एजेंसी को दिया है।
बताते चलें कि कि काशीपुर उपकोषागार कार्यालय में गोल्डन कार्ड बनाने के लिए पूरे पर्वतीय क्षेत्र व आसपास के नगरों से लोग आ रहे हैं। जिस निजी एजेंसी के द्वारा यह कार्ड बनाये जा रहे हैं उसकी ओर से एक साक्षी चौहान महिला अधिकारी यहां बैठती है। दिक्कत यह है कि सप्ताह में उनका बैठने का समय केवल दो दिन है वह भी आधे दिन तक ही बैठती हैं। इस वजह से गोल्डन कार्ड बनवाने आने वाले लोगों को परेशानी होती है।
लोगों ने बताया कि कि कई चक्कर लगाने के बाद भी उनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा है। सेवानिवृत अध्यापिका श्रीमती मिथिलश शर्मा दिल्ली रहती हैं वह गोल्डन कार्ड बनवने के लिए कई मर्तबा आ चुकी हैं। उनका स्वास्थ्य भी खराब रहता है। वहीं जसपुर से आये कुछ लोगों ने भी अपनी दिक्कतें बताई।
एस टी ओ विनोद कुमार कहते हैं कि यह काम कौन-सी निजी एजेंसी कर रही हैं इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्हें सिर्फ इतना कहा गया था कि गोल्डन कार्ड बनाने के लिए एजेंसी के लिए एक कमरा दे दिया जाये।
साक्षी चौहान नामक महिला जो कि निजी कंपनी की ओर से यहाँ बैठती हैं वह देर से आईं। उन्होंने बताया कि पहले रोज गोल्डन कार्ड बनाये जाते थे लेकिन 90 प्रतिशत कार्ड बन चुके हैं। और मुश्किल से एक दिन में दो या तीन लोग गोल्डन कार्ड बनवाने आते हैं। इसलिए सप्ताह में वह दो ही दिन कार्यालय में बैठती हैं। हालांकि उन्हें भी यह पता नहीं कि गोल्डन कार्ड किस एजेंसी के द्वारा बनाए जा रहे हैं।
बता दें कि राज्य में आयुष्मान के तहत कुल 70 लाख के करीब कार्ड बनने हैं, जिसमें से अगस्त तक 40 लाख कार्ड बन चुके हैं। 30 लाख के करीब लोगों के कार्ड बनने हैं।
उधर कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत कहते हैं कि राज्य के कई क्षेत्रों से गोल्डन कार्ड बनाने में परेशानियों की शिकायत मिली थी। इन परेशानियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि राज्य के हर नागरिक का गोल्डन कार्ड बन जाए। सरकार का प्रयास है कि यदि कोई राज्य का नागरिक है तो उसे योजना के तहत निशुल्क इलाज दिया जाएगा।
बहरहाल गोल्डन कार्ड बनवाने आ रहे लोगों की अपनी परेशानियां हैं तो निजी कंपनी के कर्मचारी अपन अलग तर्क दे रहे हैं। लेकिन इसके परिणाम स्वरूप अधिकतर बुजुर्गों व बीमार लोगों को दुश्वारियों से दो चार होना पड़ रहा है।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal


