@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा और बीजापुर जिले में टेकलगुड़ा और जोनागुड़ा गांव के जंगल में नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों पर हमले के लिए पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी बटालियन-1 के कमांडर हिडमा और सुजाता को जिम्मेदार बताया जा रहा है। साथ ही बताया गया कि नक्सलियों ने घात लगाकर सुरक्षाबलों को घेरा और उन पर हमला कर दिया।
बस्तर में माओवादियों का जोन बंटा हुआ है, हिडमा की बटालियन दक्षिण बस्तर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों की कमान संभालती है। छत्तीसगढ़ सरकार ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 लाख रुपये का इनाम रखा है। हिडमा बीजापुर और सुकमा की सीमा के पास जगरगुंडा पुलिस थाने की सीमा के तहत पूवर्ती गांव का रहने वाला है।
एक पुरानी सी तस्वीर पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद है दुबले-पतले हल्की मूंछों वाले युवक की। लेकिन अब वो 40-45 साल के बीच का शख्स है। कई पूर्व नक्सलियों और पुलिसकर्मियों के अनुसार हिडमा सुरक्षाबलों के खिलाफ ऑपरेशन में वो बर्बर है लेकिन अपनी बटालियन के साथ शांत। नक्सलियों के बीच रैंक की लड़ाई में वो अपने साथियों को बराबर सम्मान देता है। हर बड़े ऑपरेशन में वो खुद मौजूद रहता है। माओवादियों के बीच उसे नायक का दर्जा मिला हुआ है, जिसके आसपास कई कहानियां बुनी गई हैं मसलन वो इतना साहसी है कि स्थानीय बाजार में आम वेशभूषा में वो खुद खरीदारी करने आता है।
छत्तीसगढ़ में भी माओवादियों का शीर्ष नेतृत्व तेलंगाना से ही है, लेकिन अपवाद है तो बस हिडमा। रमन्ना की मौत के बाद उसके प्रमोशन की बात हुई लेकिन कई रिपोर्टों के उलट अभी भी वो सेंट्रल कमेटी का सदस्य नहीं बना है लेकिन अपने जोन में हिडमा ही कानून है।
हिडमा 20 साल से सक्रिय है, कई बार वो सुरक्षाकर्मियों के जाल में फंसने वाला ही था लेकिन बच गया। अब उसकी सुरक्षा बहुत कड़ी रहती है, वो हमेशा जंगल के अंदर ही रहता है। चूंकि वो बस्तर के इन्हीं इलाकों में पला-बढ़ा, यहीं बंदूक पकड़ी इसलिये वो जंगल के चप्पे-चप्पे से वाकिफ है। अपनी बटालियन के जवानों के 4-5 सुरक्षा घेरे के अंदर हिडमा रहता है। चूंकि इन इलाकों में ह्यूमन इंटेलिजेंस सबसे अहम है लेकिन अगर सुरक्षाबलों को लोकेशन मिलती भी है तो फोन नेटवर्क में दिक्कत की वजह से जब तक जानकारी मिलती है हिडमा आगे बढ़ चुका होता है।
90 के दशक में नक्सलियों के साथ शामिल होने वाला हिड़मा के बारे में आज कई किस्से हैं। कई लोग कहते हैं वो फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है जबकि हकीकत में वो तेलुगू, गोंडी के साथ कुछ स्थानीय बोलियां समझता और बोलता है। चार-पांच स्तरों की सुरक्षा के बीच रहने वाला हिडमा हमेशा एक-47 से लैस रहता है।


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