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काशीपुर : एन डी ए के घटक दल राष्ट्रीय लोकदल ने फूंका 2027 के चुनावी रण का बिगुल,राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी बोले—किसानों और युवाओं के सवालों पर केंद्र सरकार को करना चाहिए विचार, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (20 अक्टूबर 2026)

एनडीए में बने रहने के संकेत, उत्तराखंड में चुनाव की तैयारी तेज करने का ऐलान; चौधरी चरण सिंह की नीतियों को लेकर किसानों और युवाओं को पार्टी से जोड़ने पर दिया जोर
काशीपुर। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं।

विजयदशमी के अवसर पर काशीपुर में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए पार्टी ने आगामी चुनावी तैयारियों का बिगुल फूंक दिया। बाजपुर रोड स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोकदल के सैकड़ों कार्यकर्ता जुटे। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने अपने संबोधन और पत्रकार वार्ता में किसानों, युवाओं और ग्रामीण विकास के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए उत्तराखंड में संगठन मजबूत करने और चुनाव लड़ने की तैयारी करने की बात कही।

त्रिलोक त्यागी ने राष्ट्रीय लोकदल के संस्थापक एवं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने किसानों को राजनीति के केंद्र में लाने का काम किया। चौधरी चरण सिंह ने किसानों, मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को समझते हुए उनके समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल की राजनीति गांव, किसान, गरीब और मजदूर के हितों पर आधारित है। आज भी गांवों में शहरों के समान सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। यदि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं विकसित की जाएं, तो शहरों की ओर होने वाले पलायन और बढ़ते आबादी के दबाव को कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आज की पीढ़ी पर है। पार्टी किसानों और युवाओं को संगठन से जोड़कर आगे बढ़ेगी। उन्होंने युवाओं से राजनीति में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान करते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए किसानों, मजदूरों, महिलाओं और नौजवानों की आवाज को राजनीतिक मंच मिलना चाहिए।

त्रिलोक त्यागी ने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल एनडीए का हिस्सा है और गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन पार्टी की अपनी अलग पहचान और राजनीतिक विचारधारा भी है। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारियां की जा रही हैं। गठबंधन के स्वरूप और चुनावी रणनीति को लेकर अंतिम निर्णय समय आने पर लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी प्रदेश में अपना संगठन मजबूत कर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

पत्रकारों से बातचीत में छात्रों और युवाओं के आंदोलनों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्र हमेशा से सरकारों के सामने अपने सवाल उठाते रहे हैं। छात्र जीवन में खुद भी आंदोलनकारी गतिविधियों से जुड़े रहे त्रिलोक त्यागी ने कहा कि सरकारों को छात्रों की बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार में होने का मतलब यह नहीं है कि जनता के सवाल उठाना छोड़ दिया जाए। किसानों, महिलाओं, युवाओं और छात्रों के हितों की बात करना ही राजनीति का उद्देश्य है।
किसानों की नाराजगी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि किसानों के कई मुद्दे ऐसे हैं, जिनका समाधान केंद्र और राज्य सरकारों को करना चाहिए। उन्होंने नाराजगी के बजाय सुझावों के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने की बात कही।

उत्तराखंड के किसानों के सवालों पर उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करने और किसानों से जुड़े मुद्दों को उनके सामने रखने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ मिलकर किसानों की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी।

त्रिलोक त्यागी ने गन्ना किसानों के मुद्दे पर राष्ट्रीय लोकदल की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी किसानों के हितों को लेकर लगातार आवाज उठाती रही है। उन्होंने गन्ने का मूल्य बढ़ाने के लिए पार्टी नेताओं द्वारा किए गए प्रयासों का जिक्र किया और कहा कि किसानों के सवालों पर सरकार के सामने अपनी बात रखना जरूरी है।

उन्होंने उत्तराखंड में राष्ट्रीय लोकदल के संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। कहा कि जो कार्यकर्ता जमीन पर काम करेंगे, उन्हें संगठन में जिम्मेदारी दी जाएगी। पार्टी गांव-गांव तक पहुंचकर किसानों, युवाओं और महिलाओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करेगी।

कार्यक्रम में ठाकुरद्वारा के पूर्व विधायक विजय यादव, उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हर्षभान सहित राष्ट्रीय लोकदल के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। विजयदशमी के दिन आयोजित इस सम्मेलन को पार्टी की उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठन विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण राजनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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