@शब्द दूत ब्यूरो (17 जुलाई 2026)
काशीपुर। काशीपुर का ऐतिहासिक एवं पौराणिक गोविषाण टीला इन दिनों अपनी प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ वातावरण के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। टीले के आसपास का क्षेत्र हरे-भरे पेड़ों, खुले मैदानों और साफ-सुथरे रास्तों के कारण एक अलग ही अनुभव कराता है। खास बात यह है कि यहां इंसानों की आवाजाही बहुत कम होने के बावजूद परिसर पूरी तरह स्वच्छ दिखाई देता है।
गोविषाण टीले के भीतर बने ईंटों के रास्तों पर कहीं भी प्लास्टिक, कूड़े के ढेर या अन्य गंदगी नजर नहीं आती। इसके विपरीत शहर के कई इलाकों में नियमित सफाई व्यवस्था, कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों और जागरूकता अभियानों के बावजूद गंदगी की समस्या बनी रहती है।
यह दृश्य एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है कि क्या स्वच्छता केवल सरकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी है, या फिर प्रत्येक नागरिक का भी समान दायित्व है? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर की स्वच्छता केवल नगर निगम के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की आदतों और जागरूकता से तय होती है।
गोविषाण टीले का शांत और स्वच्छ वातावरण यह संदेश देता है कि प्रकृति को स्वच्छ बनाए रखने के लिए केवल संसाधन ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार व्यवहार भी आवश्यक है। यदि शहर का प्रत्येक नागरिक सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फैलाने और स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प ले, तो शहर की तस्वीर भी बदल सकती है।
गोविषाण टीले का यह दृश्य केवल एक ऐतिहासिक धरोहर की सुंदरता नहीं दर्शाता, बल्कि समाज के सामने आत्ममंथन का अवसर भी प्रस्तुत करता है कि आखिर स्वच्छ वातावरण बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी है।
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