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काशीपुर के ऐतिहासिक गोविषाण टीले पर फिर शुरू हुई खुदाई, एक वर्ष तक चलेगा एएसआई का उत्खनन अभियान, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (16 जुलाई 2026)

काशीपुर। काशीपुर स्थित देश के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में शामिल ऐतिहासिक एवं पौराणिक गोविषाण टीले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने एक बार फिर वैज्ञानिक उत्खनन कार्य शुरू कर दिया है। गुरुवार को कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना कर नारियल फोड़कर उत्खनन कार्य का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर एएसआई के अधिकारियों ने आयुक्त को अब तक मिले पुरातात्विक अवशेषों का अवलोकन कराया। इनमें कुषाण, गुप्त तथा उत्तरकालीन युग के मिट्टी और पत्थर के बर्तन, छिड़काव पात्र, मूर्तियों के खंड, टेराकोटा सामग्री, मनके, प्राचीन ईंटें तथा विभिन्न प्रकार की ऐतिहासिक पॉटरी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि गोविषाण टीला लंबे समय तक निरंतर आबाद रहा है और यहां विभिन्न कालखंडों की सांस्कृतिक परतें मौजूद हैं।

एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् ने बताया कि पूर्व में वर्ष 1939, 1965 तथा बाद के वर्षों में यहां सीमित उत्खनन हुआ था। अब लगभग एक वर्ष तक वैज्ञानिक पद्धति से विस्तृत खुदाई की जाएगी। संभावना है कि इस दौरान इतिहास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां और दुर्लभ अवशेष सामने आएंगे।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने आयुक्त को गोविषाण स्थल के समग्र विकास की विस्तृत योजना भी प्रस्तुत की। प्रस्तावित योजना में इंटरप्रिटेशन सेंटर, साइट म्यूजियम, पैदल मार्ग, विश्राम स्थल, शौचालय, बेबी केयर रूम तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के साथ पूरे परिसर को पर्यटन एवं विरासत स्थल के रूप में विकसित करने का खाका तैयार किया गया है।

दीपक रावत ने कहा कि गोविषाण उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों में से एक है। यहां उत्तर वैदिक काल, कुषाण, गुप्त और अन्य कालखंडों के अवशेष मिल चुके हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र सदियों तक निरंतर आबाद रहा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित उत्खनन से प्रदेश के प्राचीन इतिहास के अनेक नए तथ्य सामने आने की पूरी संभावना है।

आयुक्त ने लोगों से अपील की कि वे समय-समय पर इस ऐतिहासिक स्थल का भ्रमण करें और अपनी सांस्कृतिक विरासत को जानें। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में यहां साइट म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर बनने से गोविषाण राष्ट्रीय स्तर का प्रमुख विरासत एवं पर्यटन केंद्र बन सकेगा।

हरियाला पर्व के अवसर पर दीपक रावत ने परिसर में पौधरोपण भी किया। उन्होंने कहा कि कुमाऊँ मंडल के सभी जिलों में बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ हरित उत्तराखंड के लक्ष्य को मजबूत किया जा सके।

गोविषाण टीले के आसपास तेंदुए की आवाजाही से जुड़े सवाल पर आयुक्त ने कहा कि वन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उत्खनन के दौरान सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच किसी प्रकार का टकराव न हो।

अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. मोहन चंद्र जोशी ने बताया कि लगभग 95 एकड़ में फैले गोविषाण पुरास्थल में अब तक हुए शोध के दौरान 1000 वर्ष से भी अधिक पुराने विभिन्न कालखंडों के पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहां गुप्तकाल से लेकर पूर्व मध्यकाल तक के स्थापत्य अवशेष और ऐतिहासिक प्रमाण मिलने की संभावना है।
उन्होंने आयुक्त दीपक रावत को गोविषाण टीले के ऐतिहासिक महत्व, अब तक हुई खोजों तथा भविष्य की उत्खनन एवं संरक्षण योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी।
कार्यक्रम में कुमाऊं मंडल आयुक्त दीपक रावत के अलावा एसपी स्वप्न किशोर सिंह , एसडीएम अभय प्रताप सिंह, एएसआई के अधिकारी रमा किशोर मेहरा, कमलेश पांगती, के.बी. शर्मा, डॉ. कविता बिष्ट, डॉ. पाल सिंह राणा, प्रभारी विनोद शर्मा तथा मंडल कार्यालय का समस्त स्टाफ भी शामिल रहा।
गोविषाण टीले पर शुरू हुआ यह उत्खनन क्षेत्र के प्राचीन इतिहास से जुड़े नए तथ्यों को उजागर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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