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भीषण हादसा :चलती बस बनी आग का गोला , 20 यात्रियों की दर्दनाक मौत,यात्रियों ने हाथ जोड़कर मांगी थी जिंदगी, ग्रामीण पानी के टैंकर लेकर दौड़े, 5 दिन पहले खरीदी थी बस, स्लीपर बस कई देशों में है बैन जानिये क्यों?

चश्मदीदों के मुताबिक, यात्री बस के अंदर से हाथ जोड़कर “बचा लो” की गुहार लगाते रहे, लेकिन कुछ ही मिनटों में सब कुछ राख में बदल गया। कई ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पानी के टैंकर लेकर मौके पर पहुंचे, जबकि महिलाएं सड़कों पर चीख-चीखकर रोती रहीं।

@शब्द दूत ब्यूरो (15 अक्टूबर 2025)

राजस्थान के जैसलमेर में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। आर्मी स्टेशन के पास जैसलमेर–जोधपुर हाईवे पर चलती बस में अचानक आग लग गई, जिसमें 20 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना इतनी भयावह थी कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस राख में तब्दील हो गई।

हादसे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित कई नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “जैसलमेर, राजस्थान में बस में आग लगने से कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मैं शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूँ और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं।”

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी हादसे पर शोक जताते हुए कहा, “जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर बस में आग लगने से हुई जनहानि अत्यंत हृदय विदारक है। अपनों को खोने वाले परिजनों के प्रति गहन संवेदना व्यक्त करता हूं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दें।”

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी इस त्रासदी को “अत्यंत दुखद” बताया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।

पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी ने कहा कि यह हादसा पूरे प्रदेश और देश के लिए व्यथित करने वाला है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना की जानकारी लेते हुए जिला प्रशासन को राहत और बचाव कार्य में पूरी तत्परता बरतने के निर्देश दिए।

मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि 19 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक गंभीर रूप से घायल यात्री ने जोधपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों के शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन ने डीएनए जांच के माध्यम से पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक वजह का पता चलेगा। जैसलमेर के कलेक्टर प्रताप सिंह नाथावत और एसपी अभिषेक शिवहरे ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।

दमकल विभाग और राहत दलों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि बस कुछ ही मिनटों में पूरी तरह जलकर खाक हो गई। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता और घायलों के उपचार की व्यवस्था शुरू कर दी है।

यह हादसा जैसलमेर के इतिहास में सबसे भीषण सड़क दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है।

चश्मदीदों के मुताबिक, यात्री बस के अंदर से हाथ जोड़कर “बचा लो” की गुहार लगाते रहे, लेकिन कुछ ही मिनटों में सब कुछ राख में बदल गया। कई ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पानी के टैंकर लेकर मौके पर पहुंचे, जबकि महिलाएं सड़कों पर चीख-चीखकर रोती रहीं।

प्रशासन ने 275 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर घायलों को जैसलमेर से जोधपुर एम्स भेजा। हालांकि, एक घायल की रास्ते में ही मौत हो गई। बताया गया कि यह बस महज 5 दिन पहले ही खरीदी गई थी।

चश्मदीदों ने बताया कि आग लगते ही बस का दरवाजा ऑटो लॉक हो गया था, जिससे यात्री बाहर नहीं निकल सके। सेना की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए JCB की मदद से बस का गेट तोड़ा, तब जाकर अंदर से शवों को निकाला गया। जांच में सामने आया कि यह एक सामान्य बस थी जिसे AC स्लीपर में मॉडिफाई किया गया था। यही वजह रही कि आग लगते ही अंदर का तापमान तेजी से बढ़ा और लोगों को सांस लेने तक का मौका नहीं मिला।

विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि आखिर भारत में स्लीपर बसें बार-बार मौत की वजह क्यों बन रही हैं। दरअसल, इन बसों में बनी पतली गैलरी हादसे के वक्त यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं देती। जबकि चीन ने ऐसे डिज़ाइन वाली स्लीपर बसों को 13 साल पहले ही बैन कर दिया था।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर स्लीपर बसों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं — आखिर कब तक यात्रियों की जान नियमों की अनदेखी और मॉडिफिकेशन के खेल में झुलसती रहेगी?

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