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क्या शफीकुर्रहमान बर्क के साथ ही दफन हो गई संभल-मुरादाबाद में तुर्कों की राजनीति? अगला नेता कौन?

@शब्द दूत ब्यूरो (28 फरवरी 2024)

भारत के सबसे उम्रदराज सांसद शफीकुर्रहमान बर्क की मौत के बाद यूपी के संभल की सियासत का अगला चहरा कौन होगा इस पर चर्चा शुरू हो गई है. शफीकुर्रहमान बर्क संभल सीट से 4 बार विधायक और 2009 में संभल लोकसभा बनने के बाद 2 बार सांसद रहे हैं. संभल लोकसभा बनने से पहले बर्क मुरादाबाद से लगातार 3 बार सांसद चुने गए थे. शफीकुर्रहमान बर्क की मशहूरियत और राजनीतिक सफर इतना विशाल रहा कि उनके जीते-जी संभल के लोगों ने शायद ही उनका नेतृत्व किसी और के हाथों में देना का सोचा हो. शफीकुर्रहमान बर्क की कामयाबी के पीछे का एक कारण उनकी बिरादरी भी रही है. बर्क का ताल्लुक तुर्क बिरादरी से रहा है, जिसका वोट बैंक मुरादाबाद क्षेत्र में निर्णायक भूमिका में है.

अकेले संभल लोकसभा में ही 2.50 लाख से ऊपर तुर्क वोटों का आंकड़ा है. संभल की 5 विधानसभाओं में से 4 में तुर्क वोट निर्णायक संख्या में है और जिले की 5 सीटों में से दो पर तुर्क विधायक हैं. ऐसे में अब तुर्क बिरादरी से जिला स्तर पर अगला चहरा कौन होगा इस पर मंथन होने लगा है. हालांकि संभल निवासी मुदब्बिर कहते हैं बर्क इतनी बड़ी शख्सियत थी कि उनके बाद संभल और तुर्कों का नेता ढूंढने का तसव्वुर भी करना मुश्किल है. संभल लोकसभा क्षेत्र में इस वक्त करीब 19 लाख मतदाता हैं. जिनमें लगभग लगभग 9 लाख मुस्लिम वोट हैं. मुस्लिम में सबसे ज्यादा तुर्क उसके बाद करीब 1.50 लाख शेख मतदाता हैं. जिले में इस वक्त बिलारी सीट से फहीम इरफान और कुंदरकी सीट से जियाउर्रहमान बर्क तुर्क विधायक हैं. इसके अलावा कुंदरकी से पूर्व विधायक हाजी रिजवान और भारतीय प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद उस्मान एडवोकेट भी इस क्षेत्र के अहम तुर्क चेहरे हैं.

2009 चुनाव में दिखा था बर्क का तुर्क साथ

2009 के चुनाव में जब संभल को लोकसभा बनाया गया तो मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी से इकबाल महमूद को प्रत्याशी बनाया. इस बारे में संभल निवासी कहते हैं कि समाजवादी पार्टी के इस फैसले से नाराज तुर्क संगठनों ने शफीकुर्रहमान बर्क को बहुजन समाज पार्टी (BSP) में शामिल करा इकबाल महमूद के सामने खड़ा किया. इस चुनाव में बर्क ने SP उम्मीदवार को 13,464 वोटों से हरा दिया. हालांकि, इस जीत में बर्क को हर तबके से वोट मिला था, लेकिन इस चुनाव के बाद संभल की राजनीति में तुर्क समाज ने अपनी ताकत दिखा सबको चौंका दिया. 2024 का चुनाव करीब है और शफीकुर्रहमान बर्क के बाद अभी से ही क्षेत्र में धीमी अवाज में दूसरे तुर्क नेता पर चर्चा होने लगी है. बर्क को समाजवादी पार्टी अपनी पहली लिस्ट में संभल सीट से लोकसभा उम्मीदवार भी घोषित कर चुकी है.

क्या जियाउर्रहमान बर्क को मानेंगे अपना नेता?

संभल की कुंदरकी सीट से विधायक जियाउर्रहमान बर्क शफीकुर्रहमान बर्क के पोते हैं. वे साल 2022 में कुंदरकी सीट से पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं. 2022 में समाजवादी पार्टी ने इस सीट से तीन बार के विधायक रहे हाजी रिजवान का टिकट काट जियाउर्रहमान बर्क को प्रत्याशी बनाया था. इसके अलावा वे 2017 में संभल विधानसभा सीट से भी AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं. जियाउर्रहमान बर्क ने अपनी पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से की है. शफीकुर्रहमान बर्क के बाद उम्मीद की जा रही है कि MP का टिकट जियाउर्रहमान को ट्रांसफर हो सकता है.

संभल के स्थानीय पत्रकार फरजंद अली कहते हैं, “शफीकुर्रहमान बर्क का मुसलमानों के लिए बिना डरे स्टैंड लेना उनकी USP थी. ऐसे ही संभल के लोग उनके पोते से उम्मीद करते हैं. इसके अलावा विधायक बनने के बाद कई बार देखा भी गया है कि जिया ने भी दादा की तरह ही कुछ मुद्दों पर आवाज उठाई है.” हालांकि उन्होंने जिया के कम अनुभव की वजह से किसी और चहरे की संभावनाओं से इंकार नहीं किया.

बिलारी से 3 बार के MLA फहीम इरफान

फहीम इरफान समाजवादी के वरिष्ठ नेता आजम खां के करीबी माने जाते हैं. फहीम बिलारी विधानसभा से लगातार तीन बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं. 2012 में बनी बिलारी विधानसभा के पहले विधायक भी फहीम इरफान के पिता मोहम्मद इरफान बने थे, बाद में एक सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई उसके बाद से बिलारी सीट से फहीम इरफान विधायक हैं.

मोहम्मद उस्मान एडवोकेट

भारतीय प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद उस्मान मुरादाबाद के तुर्क समाज के बड़े चहरों में से एक हैं. इनका नाम चर्चाओं में 2019 में आया था, जब SP-BSP के साथ आने के बाद ये चर्चा थी कि गठबंधन की ओर से किसी ऐसे चेहरे को संभल से चुनाव लड़ाया जाए जो विवादों में न रहा हो. उस वक्त समाजवादी से मोहम्मद उस्मान का नाम चर्चाओं में आया था. ये भी चर्चाएं रही हैं कि मोहम्मद उस्मान संभल से अपनी दावेदारी रखते रहे हैं. मोहम्मद उस्मान बिलारी विधायक फहीम इरफान के ही चाचा हैं. वे 1993 से 2015 तक बिलारी विधानसभा के गांव इब्राहीमपुर के प्रधान रहे और 2015 में सदस्य जिला पंचायत चुने गए थे.

पूर्व विधायक रिजवान

कुंदरकी विधानसभा से वर्ष 2002, 2012 और 2017 में सपा से विधायक रहे हाजी मोहम्मद रिजवान भी इस क्षेत्र में तुर्कों के बड़े नामों में से एक हैं. कुंदरकी से 2022 में सपा ने हाजी रिजवान का टिकट काट शफीकुर्रहमान बर्क के पोते जिया को दे दिया था. जिसके बाद पार्टी से बागावत करते हुए हाजी रिजवान ने जियाउर्रहमान के खिलाफ BSP से चुनाव लड़ा था जिसमें उनको करारी हार का सामना करना पढ़ा था.

शफीकुर्रहमान बर्क का 27 फरवरी को मुरादाबाद के अस्पताल में निधन हो गया. वो लंबे समय से बीमार थे. उम्र के 94वें पड़ाव में इस दुनिया से रुख्सत होने वाले शफीकुर्रहमान मरते दम तक सांसद रहे और कुछ वक्त पहले तक ही वो सक्रिय रूप से राजनीति कर रहे थे.

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