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क्या अल्मोड़ा में जमीन के नीचे दबा है पूरा शहर, तलाश में जुटा एएसआई

@शब्द दूत डेस्क (24 दिसंबर, 2023)

उत्तराखंड की धरती अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए है। यहां प्रागैतिहासिक काल के सबूत मिलते रहे हैं, साथ ही सम्राट अशोक से भी यहां का संबंध जोड़ा जाता रहा है।

पुरातत्वविदों ने अब कुमाऊं के मशहूर शहर अल्मोड़ा में भी एक पौराणिक शहर होने की संभावना जताई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का कहना है कि यहां गेवाड़ घाटी में स्थित रामगंगा नदी के नीचे पौराणिक शहर हो सकता है। लिहाजा अब यहां सर्वे और खुदाई की कवायद होने लगी है, ताकि इतिहास के छिपे हुए पन्नों को सामने लाया जा सके।

दरअसल यहां 1000 साल पहले लुप्त हो चुकी सभ्यता के निशान तलाशे जा रहे हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग जनवरी महीने में अपनी एक टीम गेवाड़ घाटी में भेज रहा है। यह टीम नदी किनारे स्थित पहाड़ों और मैदान की जांच करेगी। यह देखेगी कि आखिरकार अल्मोड़ा जिले में जो कई सौ साल पुराने मंदिर हैं, वो यहां पर कैसे आए और किसने इनकी स्थापना की।

एएसआई को उम्मीद है कि रामगंगा नदी किनारे नौवीं शताब्दी से लेकर 15 शताब्दी तक कोई सभ्यता रही होगी, जिसने यहां विशाल मंदिर बनवाए। इसकी जांच के लिए एएसआई की एक टीम जनवरी महीने में अल्मोड़ा जाएगी। पुरातत्व सर्वेक्षण के देहरादून सर्किल के मुताबिक अगर इस दिशा में कोई ठोस सबूत मिलते हैं तो मामले को आगे बढ़ाया जाएगा और तब खुदाई की परमिशन मांगी जाएगी।

फिलहाल, उस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखकर लगता है कि नदी किनारे कभी कोई सभ्यता रही होगी। इसीलिए कई पहलुओं को देखने के बाद पुरातत्ववेत्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि वहां कोई सभ्यता जरूर रही होगी। बता दें कि गेवाड़ घाटी में चौखुटिया विकासखंड, द्वाराहाट में तड़गताल, नैगड़, जौरासी, नैथणा, खिड़ा, मासी तक के क्षेत्र शामिल हैं। अब यहां जमीन में दफन पुराने शहर के सबूत तलाशे जा रहे हैं। आने वाले समय में गेवाड़ घाटी का कोई पुराना शहर दुनिया के सामने आ सकता है, जो कि उत्तराखंड के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

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