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काशीपुर: देशभर में प्रसिद्ध है उत्तराखंड की पर्वतीय शैली की होली गायन बैठकें, महिलाओं की स्वांग की होली, पुरूषों की खड़ी व बैठकी होली, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (07 मार्च 2023)

काशीपुर। देश में ब्रज की होली के बाद सर्वाधिक होली गायन की सांस्कृतिक परंपरा उत्तराखंड की कुमाऊं की होली है। देशभर में उत्तराखंड की होली गायन को लाखों लोगों द्वारा पसंद किया जाता है। पर्वतीय होली गायन की परंपरा अपने आप में अनूठी है। यहां शास्त्रीय संगीत के साथ विभिन्न रागों के साथ गायी जाने वाली होली की धूम मची रहती है।

काशीपुर में भी होली गायन को लेकर यहां पर्वतीय मूल के साथ साथ स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखने को मिलता है। आज के इस व्यस्त समय में भी पर्वतीय अंचल के लोगों द्वारा अपने अपने घरों में पर्वतीय तर्ज़ पर होली की बैठक की जाती है। जिसमें महिलाएँ एवं पुरुषों की बैठकी होली का आयोजन किया जाता है।

परंपरागत रूप से विरासत में मिली हुई होली के गायकी से होली का शुभारंभ किया जाता है ।बैठकी होली में महिलाएँ भी मिलकर माँ चामुण्डा देवी के मन्दिर से होली की शुरुआत करते हैं। होली गायन यहां बसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। इस दौरान अलग अलग घरों में बैठकी होली का आयोजन करते हैं।

पुरुषों में बैठकी होली और खड़ी होली का बड़ा ही प्रचलन है और शहर में होल्यार अपने अपने ढंग से बैठकी होली में गायन करते हैं । काशीपुर में विशेष रूप से  बैंक कॉलोनी में मोहित उपाध्याय ,कटोरा ताल में योगेश जोशी ,मानपुर रोड इन्द्र सिंह राणा, विजय नगर गोविंद सिंह बिष्ट तारा दत्त तिवारी गौरीशंकर पाठक, प्रकाश रेजीडेंसी में कुंदन सिंह बंगारी
रामनगर रोड में वी डी कंडवाल और वैशाली कालोनी में हरि कृष्ण भट्ट ,हरीश सिंह तिलाडा, भानु प्रकाश जोशी  के यहाँ प्रतिवर्ष बैठकी होली का आयोजन किया जाता है।

 

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