Breaking News

काशीपुर :महाविद्यालय छात्र संघ चुनाव में नामांकन प्रक्रिया को लेकर प्राचार्य का निर्णय विवादों में, क्या है मामला जानिये?

@शब्द दूत ब्यूरो (22 दिसंबर 2022)

काशीपुर । राधे हरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर एक प्रत्याशी के नामांकन को वैध ठहराने को लेकर प्राचार्य का निर्णय विवादों के घेरे में आ गया है।

बता दें कि छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सूर्यम श्रीवास्तव की ओर से प्राचार्य को दिये गये लिखित पत्र में कहा गया था कि अध्यक्ष पद के दूसरे प्रत्याशी गुरकीरत सिंह भुल्लर द्वारा नामांकन पत्र में जानकारी छिपाई गई है। सूर्यम श्रीवास्तव के अनुसार अध्यक्ष पद के प्रत्याशी का नामांकन अवैध है क्योंकि नामांकन में गुरकीरत द्वारा अपने ऊपर दर्ज आपराधिक मुकदमे की बात नहीं लिखी है।

अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल ने विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव को लेकर नियमावली का हवाला देते हुए महाविद्यालय प्रशासन को मांगी गई विधिक राय के संबंध में बताया गया कि प्रत्याशी का पूर्व का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं होना चाहिए, अर्थात् उसका किसी भी प्रकार के अपराध के लिए विचारण अथवा दोषसिद्धि न हुई हो। विश्वविद्यालय प्राधिकारियों द्वारा प्रत्याशी के विरूद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही भी नहीं की गई होनी चाहिए। इस आशय का शपथ पत्र प्रत्याशी द्वारा परिशिष्ट-2 में उल्लिखित प्रारूप में प्रत्याशी द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।

इस मामले में अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल ने भी कोतवाली काशीपुर की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए बताया कि  गुरकीरत सिंह पुत्र श्री परमजीत सिंह निवासी बरखेड़ा राजपुर के विरूद्ध F.I.R-600/2022 धारा- 420, 504, 506 भादवि के अन्तर्गत आरोप पत्र संख्या 584/2022 दिनाँक 21-12-2022 को प्रेषित किया गया। ऐसे में अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी गुरकीरत सिंह का नामांकन व प्रवेश निरस्त किया जाना न्योयचित होगा।

वहीं महाविद्यालय के प्राचार्य ने नामांकन निरस्त करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि गुरकीरत सिंह के खिलाफ आज तक कोई आपराधिक मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया है जबकि कोतवाली प्रभारी ने एक पत्र जारी कर पूर्व में ही महाविद्यालय प्रशासन को अवगत करा दिया कि गुरकीरत के विरुद्ध मुकदमा दर्ज है जिसका आरोप पत्र भी प्रेषित किया जा चुका है।

कुल मिलाकर पुलिस ने गुरकीरत के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने की बात स्वीकार की है जबकि प्रधानाचार्य ने पुलिस द्वारा दी गई आख्या को भी नकार दिया है । वही गुरकीरत द्वारा जो शपथ पत्र दिया गया है उसमें भी उसने अपने ऊपर दर्ज मुकदमे को छुपाया है । कुल मिलाकर इस मामले में झोल ही झोल है फिर भी महाविद्यालय प्राचार्य ने पुलिस द्वारा दी गई आख्या और विधिक राय को नकारते हुए अपना जो निर्णय सुनाया है उसी लेकर उनकी भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है और अनेक प्रश्न अपना उत्तर मांग रहे हैं। अब देखना यह है कि जिस तरह से नामांकन प्रक्रिया को लेकर महाविद्यालय के प्राचार्य का निर्णय विवादों के घेरे में आ गया है उसके विरुद्ध शासन और प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

Website Design By Mytesta +91 8809666000

Check Also

राम मंदिर को सिंधी समाज की 200 किलो चांदी की ईंटों का दान फिर चर्चा में, वीडियो जारी होने के बाद उठे सवाल,बैंक लॉकर में सुरक्षित होने का दावा, देखिए वीडियो

🔊 Listen to this @शब्द दूत ब्यूरो (25 जून 2026) अयोध्या।  राम मंदिर निर्माण के …

googlesyndication.com/ I).push({ google_ad_client: "pub-