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पचास साल का हुआ गढ़वाल मंडल का हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय

@शब्द दूत ब्यूरो (01 दिसंबर , 2022)

तीन साल के आंदोलन के बाद एक दिसंबर 1973 को स्थापित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय 50वें साल में प्रवेश कर गया है। विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए गढ़वाल मंडल के लोगों ने भूख हड़ताल और गिरफ्तारियां दी। स्थापना काल से अब तक लगभग 20 लाख छात्र-छात्राएं यहां से डिग्री प्राप्त कर चुके हैं।

विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले उत्तराखंड खासकर गढ़वाल मंडल के छात्रों को इंटरमीडिएट के बाद उच्च शिक्षा के लिए कानपुर, आगरा और लखनऊ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। इसलिए श्रीनगर में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए वर्ष 1971 से 1973 के बीच आंदोलन चला।

आंदोलन के लिए वर्ष 1971 में उत्तराखंड विश्वविद्यालय केंद्रीय संघर्ष समिति का गठन किया गया। इसके संरक्षण की जिम्मेदारी स्वामी मन्मथन और स्वामी ओंकारानंद को दी गई। समिति में प्रेम लाल वैद्य, प्रताप पुष्पवाण, विद्या सागर नौटियाल, कृष्णानंद मैठाणी, वीरेंद्र पैन्यूली, कुंज विहारी नेगी, जयदयाल अग्रवाल, ऋषि बल्लभ सुंदरियाल और कैलाश जुगराण को जिम्मेदारियां सौंपी गई।

26 जुलाई को 1971 को विश्वविद्यालय की मांग के लिए श्रीनगर में मातृ शक्ति ने भूख हड़ताल की। 16 सितंबर 1971 को विश्वविद्यालय की मांग के लिए समूचा गढ़वाल मंडल बंद कराया गया। विश्वविद्यालय के लिए उत्तरकाशी, पौड़ी, देहरादून, चमोली और टिहरी जिलों में आंदोलन हुए। विभिन्न स्थानों में सत्याग्रहियों ने प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी दीं। स्वामी मन्मथन और कुंज विहारी नेगी को गिरफ्तार कर रामपुर जेल भेज दिया गया। लंबे आंदोलन के फलस्वरूप 23 नवंबर 1973 को उत्तर प्रदेश शासन ने श्रीनगर में राज्य विश्वविद्यालय स्थापना की अधिसूचना जारी की। एक दिसंबर 1973 से विश्वविद्यालय विधिवत रूप से संचालित होने लगा।

श्रीनगर में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 16 सितंबर 1971 में उत्तर प्रदेश विधान सभा में 23 विधायक कार्य स्थगन प्रस्ताव भी लाए थे। विधायकों ने तत्काल लोक महत्व के प्रश्न पर विचार करने की मांग की थी।

पहले बिड़ला परिसर श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय के अधीन था। इसके बाद पौड़ी और टिहरी में भी परिसर स्थापित किए गए। बिड़ला परिसर का विस्तार अलकनंदा नदी के पार चौरास में किया गया। वर्ष 1989 में गढ़वाल विश्वविद्यालय का नामकरण पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के नाम पर कर दिया गया।

एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय को 15 जनवरी 2009 को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। पांच संकाय से शुरू हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद 14 संकाय हो चुके हैं। बीडी भट्ट को गढ़वाल विश्वविद्यालय के पहले कुलपति बनने का गौरव प्राप्त है। वह वर्ष 1973 से 1977 तक कुलपति रहे। मेजर एसपी शर्मा यहां पहले कुलसचिव बने।

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