चंडीगढ़ । योग दिवस की पूर्व संध्या पर हम आपको मिलवा रहे हैं योग के एक युवा महारथी से। मूल रूप से रानीखेत के निकट मानिला के रहने वाले युवा मयंक शर्मा अपनी युवावस्था में ही योग के अनेक कठिन आसनों को करने में महारत हासिल कर चुके हैं।

सिविल इंजीनियरिंग से बी टेक कर चुके मयंक शर्मा के योग के आसनों को देखकर आप हैरान रह जायेंगे। तमाम कठिन माने जाने वाले योग के आसनों को मयंक इतनी खूबी के साथ कर लेते हैं कि एकबारगी तो आपको योग आसान लगने लगेगा। पर मयंक बताते हैं कि दिनोंदिन कठिन अभ्यास करना उनकी आदत बन चुकी हैं। जहाँ एक ओर आज युवा आधुनिक संसाधनों की चकाचौंध में अपनी सांस्कृतिक विरासत और पुरातन पद्धति को भुला रहे हैं वहाँ मयंक ऐसे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
मयंक के पिता हरीश चन्द्र शर्मा केन्द्रीय भूमि एवं मृदा सरंक्षण अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। जबकि माताजी इंदु शर्मा गृहिणी है। मयंक कहते हैं कि योग की इस साधना में उनके परिवार का उन्हें पूरा सहयोग मिलता है। उनक दो बहनों में से एक भारती शर्मा उत्तराखंड के महाविद्यालय में प्रोफेसर तथा दूसरी बहन हिमानी शर्मा साहित्यकार होने के साथ शिक्षिका हैं। 



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