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बड़ी खबर : नेपाल सीमा से लगे उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों में धर्मांतरण के आरोप, थारू-बुक्सा जनजाति की जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त की भी जांच

@शब्द दूत ब्यूरो (14 अक्टूबर 2026)

खटीमा। उत्तराखंड के नेपाल सीमा से सटे खटीमा, सितारगंज और नानकमत्ता क्षेत्र में कथित धर्मांतरण और थारू-बुक्सा जनजाति की जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त का मामला चर्चा में है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, धर्मांतरण कानून के तहत कार्रवाई की गई है, जबकि जनजातीय भूमि की खरीद-फरोख्त में कथित अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है। मामले को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर सख्ती बरतने की बात कही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खटीमा और आसपास के क्षेत्रों में कुछ धार्मिक संस्थाओं तथा मिशनरी गतिविधियों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को शिक्षा, चिकित्सा और अन्य सहायता के माध्यम से प्रभावित कर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों और क्षेत्र में धर्मांतरित लोगों की संख्या से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

पुलिस के अनुसार, दान सिंह राणा समेत चार आरोपियों के खिलाफ धर्मांतरण कानून के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा गया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। खटीमा के पुलिस क्षेत्राधिकारी नीरज सेमवाल ने बताया कि आरोपियों के दोबारा ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने अदालत में उनकी जमानत निरस्त करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि थारू जनजाति की जमीनों की कथित अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल कुछ लोगों को चिह्नित किया गया है।

थारू-बुक्सा जनजाति की जमीनों को लेकर चिंता

खटीमा, सितारगंज और नानकमत्ता के आसपास थारू जनजाति की जमीनों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि नेपाल सीमा की ओर जाने वाले राजमार्ग के आसपास स्थित कीमती जमीनों पर भू-माफिया की नजर है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि धर्मांतरण और जमीनों के लेन-देन के मामलों के बीच संबंधों की जांच की जानी चाहिए।

इस क्षेत्र में थारू और बुक्सा जनजातियों की बड़ी आबादी निवास करती है। इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति के रूप में मिलने वाले अधिकारों और सुविधाओं को लेकर भी बहस सामने आई है। हालांकि, धर्म परिवर्तन करने वाले सभी लोगों के संबंध में एक समान निष्कर्ष निकालने के बजाय प्रत्येक मामले में लागू कानून, पात्रता और संबंधित तथ्यों की जांच आवश्यक है।

सितारगंज और खटीमा में धार्मिक केंद्रों को लेकर आरोप

प्राप्त विवरण के अनुसार, सितारगंज क्षेत्र के अनुग्रह आश्रम और खटीमा रोड स्थित एक धार्मिक केंद्र सहित आसपास के कुछ स्थानों पर नियमित प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं। आरोप है कि इन सभाओं में थारू तथा राय सिख समुदाय के लोग भी शामिल होते हैं और कुछ लोगों को आर्थिक सहायता एवं घरेलू उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ शिक्षण संस्थानों के माध्यम से बच्चों को मुफ्त पढ़ाई, किताबें, स्टेशनरी और अन्य सामग्री उपलब्ध कराते हुए ईसाई धर्म से संबंधित जानकारी दी जाती है। इन गतिविधियों को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित संस्थानों के पक्ष और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है। धार्मिक शिक्षा, सामाजिक सेवा और अवैध धर्मांतरण के बीच कानूनी अंतर को भी ध्यान में रखना होगा।

क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों और बस्तियों में भी मिशनरी गतिविधियां संचालित होने के दावे किए गए हैं। हालांकि, किसी संस्था या समुदाय की गतिविधियों को अवैध घोषित करने के लिए केवल आरोप पर्याप्त नहीं हैं; इसके लिए जांच और कानूनी प्रक्रिया आवश्यक है।

एडीएम ने जनजाति प्रमाण पत्रों पर कार्रवाई की दी जानकारी

ऊधम सिंह नगर के अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा ने बताया कि जिले में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले सामने आए हैं। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी कर जनजाति प्रमाण पत्रों के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।

इस विषय में प्रमाण पत्रों की पात्रता, संबंधित व्यक्तियों की स्थिति और लागू कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे। किसी व्यक्ति का जनजाति प्रमाण पत्र निरस्त करने की प्रक्रिया नियमानुसार और संबंधित तथ्यों के परीक्षण के बाद ही पूरी की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री धामी ने धर्मांतरण पर सख्त कार्रवाई की बात कही

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ नेपाल सीमा से लगा सीमांत राज्य भी है। यहां धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं के विरोध में अवैध गतिविधियां करने वालों के खिलाफ सख्त धर्मांतरण कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार, धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को मिलने वाली जनजातीय सुविधाओं और आरक्षण के संबंध में भी कानूनी प्रावधानों के अनुरूप कदम उठाए जाएंगे।

धर्मांतरण कानून और जनजातीय अधिकारों पर निगाहें

उत्तराखंड में धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिए कानूनी प्रावधान लागू हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की जांच, अदालत की प्रक्रिया और प्रशासनिक स्तर पर प्रमाण पत्रों की पात्रता का परीक्षण महत्वपूर्ण है। वहीं, जनजातीय समुदायों की भूमि की सुरक्षा और अवैध खरीद-फरोख्त पर रोक लगाना भी प्रशासन के सामने अहम विषय है।

खटीमा, सितारगंज और नानकमत्ता क्षेत्र में सामने आए इन मामलों में अब पुलिस की कार्रवाई, अदालत में चल रही प्रक्रिया और प्रशासन द्वारा की जा रही जांच पर नजर रहेगी। आरोपों की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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