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देहरादून :एफ आर आई रेंजर्स कॉलोनी की सरकारी भूमि पर बनी मजार वक्फ में दर्ज, दस्तावेज न मिलने से उम्मीद पोर्टल पर नहीं हो सकी प्रविष्टि

@शब्द दूत ब्यूरो (04 जून 2026)

देहरादून। भारत सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने की समय-सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद अनेक ऐसी संपत्तियां सामने आ रही हैं, जिनकी प्रविष्टि अब तक पोर्टल पर नहीं हो सकी है। इसकी प्रमुख वजह संबंधित भूमि एवं स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का उपलब्ध न होना बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) रेंजर्स कॉलोनी, कॉन्वेंट रोड क्षेत्र में स्थित एक मजार भी ऐसे ही मामलों में शामिल है। बताया जाता है कि यह मजार वक्फ अभिलेखों में यूके डीडी-0334 के रूप में दर्ज है, जबकि संबंधित भूमि वन विभाग की सरकारी भूमि बताई जा रही है। उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान इस संपत्ति से जुड़े स्वामित्व अथवा दान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह मजार सैय्यद जमाल शाह के नाम से जानी जाती है, लेकिन भूमि के स्वामित्व अथवा दान संबंधी कोई प्रमाणिक दस्तावेज सामने नहीं आए हैं। वक्फ संपत्ति के संबंध में सामान्य नियम यह है कि वह किसी व्यक्ति द्वारा धार्मिक अथवा जनकल्याणकारी उद्देश्यों के लिए दान की गई संपत्ति हो, जिसकी आय का उपयोग सामाजिक कार्यों में किया जाता हो।

क्षेत्र में यह भी चर्चा का विषय रहा है कि गुरुवार के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मजार के आसपास धार्मिक सामग्री की दुकानें संचालित होती हैं तथा विभिन्न प्रकार की धार्मिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं। इस कारण क्षेत्र में आवागमन और भूमि की स्थिति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, संबंधित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में वन विभाग की संपत्ति के रूप में दर्ज है और मजार प्रबंधन के पास भूमि संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा मामले की जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि प्रशासन इस संबंध में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर विचार कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार राज्यभर में सरकारी भूमि पर बनी अवैध धार्मिक संरचनाओं के विरुद्ध अभियान चला रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक सैकड़ों अवैध मजारों और अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में एफआरआई रेंजर्स कॉलोनी स्थित इस मजार का मामला भी प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है।

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