@शब्द दूत ब्यूरो (13 मई 2026)
देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के सुल्तानपुर नगर पंचायत क्षेत्र में कथित रूप से सबसे ऊंची मीनारों वाली मस्जिद के निर्माण का कार्य एक बार फिर शुरू होने की खबर सामने आई है। करीब सात माह तक निर्माण कार्य बंद रहने के बाद अब दोबारा गतिविधियां शुरू होने से मामला फिर चर्चा में आ गया है।
बताया जा रहा है कि इस मस्जिद को लेकर पहले भी सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया था कि यहां राज्य की सबसे बड़ी मस्जिद और सबसे ऊंची मीनार का निर्माण किया जा रहा है। करीब दस माह पहले जिला प्रशासन ने निर्माण कार्य में अनियमितताएं पाए जाने और आवश्यक अनुमति न होने के चलते इस पर रोक लगा दी थी।
अक्टूबर 2025 में यह मामला सुर्खियों में आया था, जब हरिद्वार प्रशासन ने बिना स्वीकृति निर्माण होने पर नोटिस जारी कर काम रुकवा दिया था। अधिकारियों के अनुसार निर्माण से संबंधित कोई स्पष्ट जवाब भी नहीं दिया गया था, जिससे यह संकेत मिला कि निर्माण कार्य बिना अनुमति के किया जा रहा था।
नियमों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के 2009 और 2016 के निर्देशों के तहत किसी भी धार्मिक संरचना का निर्माण बिना जिला प्रशासन की अनुमति के नहीं किया जा सकता। इन नियमों का उद्देश्य सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकना और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
राज्य में मस्जिदों के निर्माण को लेकर भी आंकड़े चर्चा में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में 700 से अधिक मस्जिदें हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या हरिद्वार जिले में बताई जाती है। इसके अलावा देहरादून, उधम सिंह नगर और नैनीताल जिलों में भी बड़ी संख्या में मस्जिदें मौजूद हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई निर्माण बिना विधिवत अनुमति के किए जा रहे हैं और कुछ मामलों में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
निर्माण मानकों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मस्जिद की मीनार की ऊंचाई करीब 250 फीट बताई जा रही है, जो सामान्य स्वीकृत मानकों से अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए विशेष तकनीकी अनुमति और संरचनात्मक जांच आवश्यक होती है।
इस पूरे मामले पर हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि पहले निर्माण कार्य को नोटिस देकर रुकवाया गया था। यदि अब फिर से निर्माण शुरू हुआ है, तो प्रशासन इसकी जांच करेगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में आने की संभावना के साथ एक बार फिर सुर्खियों में है।
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