@शब्द दूत ब्यूरो (25 मार्च 2026)
काशीपुर। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर खोखरा देवी मंदिर में लगने वाले पारंपरिक मेले में इन दिनों रौनक धीरे-धीरे बढ़ती नजर आ रही है। दूर-दराज क्षेत्रों, खासकर बिजनौर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर को माता वैष्णो देवी के स्वरूप के रूप में माना जाता है और यहां की मान्यता के अनुसार सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
हालांकि, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच मेले की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। खासतौर पर महिला श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मेले में शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने से महिलाओं को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन और आयोजकों से इस समस्या को लेकर शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
मेले में दुकान लगाने वाले 83 वर्षीय दुकानदार सोमपाल सिंह ने बताया कि पिछले 50 वर्षों में महंगाई का असर साफ देखा जा सकता है। जहां पहले प्रसाद सवा में मिल जाता था, वहीं आज वही प्रसाद ₹50 से ₹100 तक पहुंच गया है। इसी तरह पहले ₹1500 में मिलने वाली दुकान अब करीब ₹1 लाख में मिल रही है। व्यापारियों के अनुसार महंगाई के चलते मेले में करीब 20% तक असर पड़ा है और भीड़ भी पहले की तुलना में कुछ कम नजर आ रही है।
श्रद्धालुओं का यह भी कहना है कि अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ने के कारण भीड़ का वितरण बदल गया है, जिससे कुछ दिनों में अपेक्षाकृत कम भीड़ दिखाई दे रही है।
मेले में एक प्राचीन बरगद का पेड़ भी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यह पेड़ सतयुग काल से मौजूद है और यहां शनि देव एवं ब्रह्मदेव की पूजा के साथ वट सावित्री व्रत भी किया जाता है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यह पेड़ मंदिर परिसर का सबसे प्राचीन और पवित्र स्थल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां डोला निकालने की अनुमति प्रशासन द्वारा नहीं दी जाती, जबकि आसपास के अन्य मंदिरों में यह परंपरा निभाई जाती है।
कुल मिलाकर, खोखरा देवी मेले में आस्था और श्रद्धा का उत्साह तो बरकरार है, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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