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योग फाउंडेशन की आड़ मे था नकली नोट छापने का नेटवर्क, 2.5 करोड़ के नोट बरामद , ‘प्रदीप गुरुजी’ समेत सात आरोपी गिरफ्तार

जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क योग और आध्यात्मिक गतिविधियों की आड़ में संचालित किया जा रहा था।

@शब्द दूत ब्यूरो (21 मार्च 2026)

अहमदाबाद/सूरत। गुजरात में नकली करेंसी के एक बड़े और संगठित रैकेट का खुलासा हुआ है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए स्वयंभू आध्यात्मिक गुरु ‘प्रदीप गुरुजी’ समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के पास से करीब 2.3 से 2.9 करोड़ रुपये तक की नकली भारतीय मुद्रा बरामद की गई है।

जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क योग और आध्यात्मिक गतिविधियों की आड़ में संचालित किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट का संचालन सूरत स्थित एक योग फाउंडेशन से किया जा रहा था, जहां बाकायदा नकली नोट छापने की व्यवस्था बनाई गई थी।

क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि बड़ी मात्रा में नकली नोट अहमदाबाद में खपाए जाने वाले हैं। इसके बाद पुलिस ने अमराईवाड़ी इलाके में घेराबंदी कर एक वाहन को रोका, जिसमें से भारी मात्रा में 500 रुपये के नकली नोट बरामद हुए।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नकली नोट सूरत से लाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सूरत में छापेमारी कर प्रिंटिंग यूनिट का खुलासा किया और वहां से मशीनें, कागज व अन्य उपकरण जब्त किए।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह नकली नोट बनाने के लिए विशेष प्रकार का कागज चीन से मंगवाता था, जिसमें असली नोट जैसी सुरक्षा विशेषताओं की नकल की जाती थी।

इसके बाद हाई-प्रिसिजन प्रिंटर और डिजाइनिंग तकनीक की मदद से 500 रुपये के नोट छापे जाते थे। गिरोह ने पहले छोटे स्तर पर बाजार में इन नोटों को चलाकर उनकी “क्वालिटी टेस्ट” की, और सफल होने के बाद बड़े पैमाने पर सप्लाई शुरू की।

पुलिस के अनुसार, प्रदीप गुरुजी इस पूरे रैकेट का मुख्य सरगना था और बाकी आरोपी उसके अनुयायी थे। गिरोह ने पिछले कई महीनों से योजना बनाकर इस अवैध काम को अंजाम दिया।

आरोपियों ने एजेंटों के जरिए बाजार में नकली नोट खपाने की व्यवस्था बनाई थी और इसके बदले कमीशन भी तय किया गया था।

पूछताछ के दौरान प्रदीप गुरुजी ने दावा किया कि यह काम “सामाजिक सेवा” के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से किया जा रहा था। हालांकि पुलिस इस दावे को गंभीरता से नहीं मान रही और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।

जांच का दायरा अब अहमदाबाद, सूरत और राजकोट तक फैल चुका है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी नकली करेंसी बाजार में फैलाई और इसमें और कौन-कौन शामिल हैं।

यह मामला इस बात का संकेत है कि नकली करेंसी के नेटवर्क अब अधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुके हैं। आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चैन के जरिए ऐसे गिरोह देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।

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