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फर्जी आईएएस समझकर पुलिस ने किया गिरफ्तार, अगले दिन निकले 2008 बैच के असली अधिकारी, फिर मचा हड़कंप, पुलिस की कार्यशैली संदेह के घेरे में

हालांकि अगले ही दिन मामले में नया मोड़ आ गया। राहुल कौशिक के परिवार ने मीडिया के सामने कई दस्तावेज पेश किए, जिनमें यूपीएससी परीक्षा पास करने के प्रमाण पत्र और प्रशिक्षण से जुड़े कागजात शामिल बताए गए।

@शब्द दूत ब्यूरो (17 मार्च 2026)

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने जिस व्यक्ति को फर्जी आईएएस अधिकारी बताकर गिरफ्तार किया, वह बाद में 2008 बैच का वास्तविक आईएएस अधिकारी निकला। हालांकि वह फिलहाल सेवा से बर्खास्त है और उसका मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरठ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामला 12 मार्च 2026 का बताया जा रहा है। मेरठ के नौचंदी थाना पुलिस को फोन पर सूचना मिली कि राहुल कौशिक नाम का एक व्यक्ति नशे की हालत में हंगामा कर रहा है और खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों पर रौब झाड़ रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और राहुल कौशिक को हिरासत में ले लिया।

इसके बाद मेरठ पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा है जो खुद को झूठा आईएएस बताकर अधिकारियों पर दबाव बना रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी अपने घर के बाहर बोर्ड लगाकर खुद को एडिशनल सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी बताता था और विभिन्न विभागों में फोन कर अधिकारियों से बात करता था।

हालांकि अगले ही दिन मामले में नया मोड़ आ गया। राहुल कौशिक के परिवार ने मीडिया के सामने कई दस्तावेज पेश किए, जिनमें यूपीएससी परीक्षा पास करने के प्रमाण पत्र और प्रशिक्षण से जुड़े कागजात शामिल बताए गए। परिवार का दावा है कि राहुल कौशिक 2008 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और उन्हें फर्जी बताना गलत है।

परिवार के अनुसार वर्ष 2017 में राहुल कौशिक पर नौकरी दिलाने के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी का आरोप लगा था। इसके बाद वर्ष 2019 में विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। राहुल कौशिक ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है और मामला फिलहाल केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में विचाराधीन है।

राहुल कौशिक ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच के दौरान पुलिस ने उनका बयान तक दर्ज नहीं किया और उन्हें जल्दबाजी में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले में पुलिस के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर सकते हैं।

फिलहाल पूरे प्रकरण को लेकर मेरठ पुलिस जांच में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान कहां गलती हुई और किस आधार पर व्यक्ति को फर्जी आईएएस बताकर गिरफ्तार किया गया। वहीं इस घटना के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी चर्चा का माहौल बना हुआ है।

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