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काशीपुर :अग्निकांड पीड़ितों के पास मेयर पहुंचे ही नहीं ! मानवीय संवेदना से ओतप्रोत दीपक बाली वहाँ जरूर नजर आये

@शब्द दूत ब्यूरो (14 मार्च 2026)

काशीपुर।  आज सुबह हुए भीषण अग्निकांड के बाद पीड़ित व्यापारियों से मिलने पहुंचे महापौर दीपक बाली ने एक आम राजनेता की छवि से हटकर मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा शहर में हो रही है। आमतौर पर ऐसे हादसों के बाद राजनेता घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों को सांत्वना देते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और औपचारिकता निभाकर चले जाते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग थी।

घटनास्थल पर पहुंचे दीपक बाली किसी पद की औपचारिकता निभाने नहीं आए थे। वहां मौजूद लोगों को भी यही महसूस हुआ कि वह एक महापौर के रूप में नहीं बल्कि समाज के एक संवेदनशील व्यक्ति के रूप में पीड़ित दुकानदारों का दर्द बांटने पहुंचे हैं।

अग्निकांड से प्रभावित दुकानदारों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनकी पीड़ा को नजदीक से समझा और केवल सांत्वना देकर लौटने के बजाय अपनी व्यक्तिगत ओर से 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। यह सहायता न केवल आर्थिक रूप से बल्कि भावनात्मक रूप से भी पीड़ित परिवार के लिए बड़ा सहारा साबित हुई।

दरअसल, किसी भी आपदा या हादसे के बाद सबसे ज्यादा जरूरत संवेदना और साथ की होती है। दीपक बाली ने यह संदेश दिया कि सच्ची सहानुभूति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में दिखाई देती है। उन्होंने यह भी साबित किया कि किसी की मदद करने के लिए केवल संवेदनशील हृदय ही नहीं, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़कर सहयोग करना भी जरूरी है।

समाज में ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं जब कोई जनप्रतिनिधि अपने पद की सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानियत का परिचय दे। काशीपुर में अग्निकांड के बाद दीपक बाली का यह कदम न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि देश के अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश है कि राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देना ही सच्ची जनसेवा है।

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