@शब्द दूत ब्यूरो (05 मार्च 2026)
काशीपुर। उत्तर भारत के प्रसिद्ध चैती मेले की तैयारियां काशीपुर में जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। चैत्र नवरात्र के साथ 19 मार्च से प्रारंभ होने वाले इस मेले को लेकर मंदिर परिसर में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और निर्माण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। मंदिर के मुख्य पंडा पंडित विकास अग्निहोत्री ने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई नई व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में यात्रियों के लिए चार नए यात्री निवास बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु निशुल्क ठहर सकेंगे। इन यात्री निवासों में पंखों सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी। साथ ही मुंडन संस्कार के लिए एक बड़ा हॉल तैयार किया जा रहा है, ताकि छोटे बच्चों और परिवारों को भीड़भाड़ से अलग व्यवस्थित स्थान मिल सके।
मंदिर समिति द्वारा इस बार एक नवीन भंडार कक्ष का निर्माण भी कराया जा रहा है, जहां मंदिर में होने वाले भंडारों की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा मंदिर के दक्षिण द्वार के पास श्रद्धालुओं के लिए एक नया प्याऊ बनाया जा रहा है। इसके लिए करीब 300 फुट गहरा बोर कराया गया है, ताकि मेले के दौरान आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल मिल सके।
पंडित विकास अग्निहोत्री ने बताया कि 25 मार्च की अर्धरात्रि को माता भगवती की डोला यात्रा नगर मंदिर से चैती मेला परिसर पहुंचेगी। इसके बाद माता की प्रतिमा 31 मार्च तक यहां विराजमान रहेगी। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगेंगे।
उन्होंने बताया कि मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इसलिए इस बार मंदिर परिसर का विस्तार और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है, ताकि दर्शन के दौरान किसी को असुविधा न हो। साथ ही मंदिर परिसर में लगाए गए पेड़ों के संरक्षण के लिए भी विशेष कदम उठाए गए हैं।
पंडा विकास अग्निहोत्री ने बताया कि वर्ष 2018 से मेले की व्यवस्था प्रशासन के अधीन संचालित हो रही है और इससे संबंधित मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। वर्तमान में मेले के संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन द्वारा संभाली जा रही है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि चैती मेले में आने वाले सभी भक्त सहयोग और अनुशासन बनाए रखें, जिससे सभी को माता भगवती के दर्शन सुगमता से हो सकें।
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