@विनोद भगत
भारत में सोने की कीमतों में हाल के महीनों में जो तेजी देखने को मिल रही है, उसके पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। इन्हीं कारणों में एक अहम वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से समय-समय पर दी जाने वाली टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाने की धमकियाँ भी मानी जा रही हैं। सीधे शब्दों में कहें तो ट्रंप की यह नीति वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ाती है और यही अनिश्चितता सोने को महँगा करती है।
जब ट्रंप टैरिफ बढ़ाने की बात करते हैं, तो इसका सीधा संकेत यह होता है कि अमेरिका और अन्य बड़े देशों के बीच व्यापार युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। व्यापार युद्ध का मतलब है वैश्विक कारोबार में रुकावट, कंपनियों की लागत बढ़ना, मुनाफे पर असर और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ना। ऐसी परिस्थितियों में शेयर बाजार और जोखिम भरे निवेश विकल्प कमजोर पड़ते हैं। निवेशक तब अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोने जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जैसे ही सोने की मांग बढ़ती है, उसकी कीमत ऊपर जाती है। भारत दुनिया का बड़ा सोना आयातक देश है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय भाव बढ़ते ही उसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है। डॉलर में महँगा हुआ सोना रुपये में और भी ज्यादा महँगा हो जाता है, खासकर तब जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो। इस तरह ट्रंप की टैरिफ धमकियाँ परोक्ष रूप से भारत में सोने के दाम बढ़ाने में योगदान देती हैं।
टैरिफ की आशंका से सिर्फ सोने की मांग ही नहीं बढ़ती, बल्कि डॉलर की मजबूती और करेंसी बाजार में अस्थिरता भी देखने को मिलती है। कई बार निवेशक अमेरिकी डॉलर को भी सुरक्षित मानते हैं, जिससे डॉलर मजबूत होता है और उभरते बाजारों की मुद्राएँ दबाव में आती हैं। भारत में इसका मतलब यह होता है कि सोने का आयात और महँगा हो जाता है, जिससे घरेलू कीमतों में और तेजी आती है।
हालांकि यह कहना गलत होगा कि भारत में सोने के दाम सिर्फ ट्रंप की टैरिफ धमकियों से ही बढ़ रहे हैं। घरेलू मांग, शादी-ब्याह का सीजन, केंद्रीय बैंकों की सोना खरीद, ब्याज दरों की दिशा, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई अन्य कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं। लेकिन ट्रंप की टैरिफ नीति इन सभी कारणों के ऊपर एक ऐसा वैश्विक दबाव बनाती है, जो निवेशकों की मानसिकता को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ देती है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की टैरिफ धमकियाँ भारत में सोने के दाम बढ़ने का प्रत्यक्ष कारण नहीं, लेकिन एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कारक जरूर हैं। जब भी ऐसी धमकियाँ वैश्विक बाजार में डर और अनिश्चितता बढ़ाती हैं, तो उसका फायदा सोने को मिलता है और नुकसान आम उपभोक्ता की जेब को। आने वाले समय में अगर वैश्विक व्यापार तनाव कम होता है, तो सोने की कीमतों में कुछ राहत भी देखने को मिल सकती है, लेकिन जब तक अनिश्चितता बनी रहेगी, सोना मजबूत बना रह सकता है।
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